कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा कदम, SIR ट्रिब्यूनल के लिए बनाई विशेष समिति

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कोलकाता, संवाददाता : बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के कानूनी और प्रशासनिक गहमागहमी के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने एसआईआर ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने और प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने के लिए तीन पूर्व न्यायाधीशों की एक विशेष समिति का गठन किया है।

यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोमवार को दिए गए उन निर्देशों के बाद आया है, जिसमें 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों के लिए एक समान प्रक्रिया निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया था।

समिति में अनुभवी न्यायविदों का समावेश हाई कोर्ट द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय समिति में कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रदीप्त राय और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रणब कुमार देब को शामिल किया गया है।

मतदाता सूची से बाहर किए गए नागरिकों के दावों और अपीलों का निपटारा ट्रिब्यूनल के 19 न्यायाधीश किस पद्धति से करेंगे

समिति मुख्य रूप से यह निर्धारित करेगी कि मतदाता सूची से बाहर किए गए नागरिकों के दावों और अपीलों का निपटारा ट्रिब्यूनल के 19 न्यायाधीश किस पद्धति से करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने आशा व्यक्त की है कि यह समिति तत्काल अपनी सिफारिशें सौंपेगी ताकि अपीलों का निपटारा त्वरित गति से हो सके।

लाखों नाम सूची से बाहरआयोग द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को प्रकाशित एसआइआर सूची में लगभग 60.06 लाख मतदाताओं के नाम विचाराधीन श्रेणी में थे।

न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई सघन जांच के बाद जारी रिपोर्ट में कई तथ्य सामने आए हैं। इसके तहत कुल 27,16,393 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जबकि 32,68,119 नागरिकों के नाम सूची में बहाल कर दिए गए हैं।

अपील का मौका और भविष्य की राहजिन नागरिकों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, उनके पास अब ट्रिब्यूनल में अपील करने का विकल्प है।

बंगाल में एसआईआर ट्रिब्यूनल को दो अप्रैल से सक्रिय होना था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से इसमें देरी हुई। अब नई समिति द्वारा तय की गई प्रक्रिया के तहत, राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों और आम नागरिकों की अपीलों पर न्यायिक विचार किया जाएगा।

न्यायालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैध मतदाता का लोकतांत्रिक अधिकार प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण बाधित न हो।

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