आहत किसान ने दी जान, जिसने भी पढ़ा संग्राम का सुसाइड नोट उसकी आंखें हुईं नम

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करहल, संवाददाता : किसान संग्राम सिंह ने चकबंदी प्रक्रिया से आहत होकर खुदकुशी कर ली, जान देने से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट भी लिखा, जो कि परिजन ने वहां पहुंचे अधिकारियों को दिखाया, सुसाइड नोट में चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर किसान का दर्द छलक रहा था, नोट में कहा कि आलू भूड़ में उनका चक नहीं रहा। 

यूपी के मौनपुरी स्थित ग्राम पंचायत भांती के मजरा दौलतपुर के एक किसान ने मूल जोत से चक हटा देने से आहत होकर खुदकुशी कर ली। किसान का शव झोपड़ी में फंदे पर लटका मिला। किसान ने सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें उन्होंने चकबंदी के लिए रुपये मांगने का आरोप लगाकर आत्महत्या की बात कही। आत्महत्या की सूचना पर एसडीएम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची, परिजन से जानकारी लेने के बाद जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया, पुलिस ने किसान के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय स्थित मोर्चरी भेजा।

चक हटाए जाने से आहत थे संग्राम सिंह 
तहसील के कुर्रा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भांती में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत कई किसानों की मूल जोत से चक हटा दिए गए हैं। उन्हें दूसरे स्थान पर चक दिए गए हैं। ग्राम पंचायत के मजरा दौलतपुर के रहने वाले 70 वर्षीय किसान मूल जोत से चक हटाए जाने से आहत थे।

सोमवार रात किसी समय उन्होंने अपनी झोपड़ी में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली

सोमवार रात किसी समय उन्होंने अपनी झोपड़ी में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। मंगलवार सुबह जानकारी हुई तो परिजन में चीख-पुकार मच गई। रोते बिलखते परिजन चकबंदी प्रक्रिया को गलत बताते हुए डीएम को बुलाने की मांग करने लगे। एसडीएम सुनिष्ठा सिंह, सीओ करहल व पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और परिजन से जानकारी ली। उन्हें आश्वासन दिया कि आरोप की जांच कराई जाएगी, कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हुए। पुलिस ने शव जिला मुख्यालय स्थित मोर्चरी भेजा। 

सुसाइड नोट में छलका किसान का दर्द
किसान संग्राम सिंह ने चकबंदी प्रक्रिया से आहत होकर खुदकुशी कर ली, जान देने से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट भी लिखा, जो कि परिजन ने वहां पहुंचे अधिकारियों को दिखाया, सुसाइड नोट में चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर किसान का दर्द छलक रहा था, नोट में कहा कि आलू भूड़ में उनका चक नहीं रहा।

वह ब्लॉक में गए तो चकबंदी वालों ने रुपये मांगे, उनके पास रुपये नहीं थे, इसलिए खुदकुशी कर ली। सुसाइड नोट में यह भी लिखा था कि उनका शव उनके चक पर ही लगाया जाए, उनकी मूर्ति भी लगवाई जाए। शव का पोस्टमार्टम न कराया जाए। यह भी लिखा था कि उनके जाने के बाद बच्चों की सुनवाई की जाए और नौकरी लगवाई जाए। जिसने भी किसान का दर्द पढ़ा, उसकी आंखे नम हो गईं।

पहले भी एक किसान की हो चुकी है मौत

ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत भांती के मजरा गांव तरा में 12 मार्च की रात किसान प्रदीप कुमार ने मौत हो गई थी। एक मृतक किसान की पत्नी ने आरोप लगाया था कि चकबंदी प्रक्रिया से आहत होकर खुदकुशी करने का आरोप लगाया था। 

गांव में हुई थी पंचायत, चकबंदी कार्यालय पर किया था प्रदर्शन
ग्राम पंचायत भांती मे चकबंदी प्रक्रिया से किसान असंतुष्ट हैं, भ्रष्टाचार का भी आरोप लगा रहे हैं, रविवार को असंतुष्ट किसानों ने पंचायत भी की थी, सोमवार को चकबंदी कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था। 

भाकियू महात्मा टिकैत के पदाधिकारी भी पहुंचे
गांव दौलतपुर में किसान की मौत की घटना के बाद भारतीय किसान यूनियन महात्मा टिकैत के जिलाध्यक्ष लालू यादव भी अन्य पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे, कहा कि किसान की मूल जोत से चक हटा दिया था, जिससे परेशान होकर आत्महत्या कर ली। जिलाध्यक्ष ने जांच कराए जाने व खुदकुशी के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 

परिजन की ओर से चकबंदी प्रक्रिया से आहत होकर किसान के खुदकुशी किए जाने की जानकारी दी गई, मामले में गहनता से जांच कराई जाएगी। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। -सुनिष्ठा सिंह, एसडीएम करहल

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