नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : ईरान युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका असर साफ दिखा। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण तेल, व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा दबाव पड़ा। इसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर यात्रा और बाजार तक हर जगह देखने को मिला। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी आर्थिक हलचल पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, वहां लगभग ठहराव की स्थिति बन गई। इससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। तेल महंगा होने के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत भी बढ़ गई है। इसका असर धीरे-धीरे हर चीज पर दिख रहा है, चाहे वह खाने का सामान हो या रोजमर्रा की जरूरत की चीजें। दुनियाभर के बाजार भी इस संकट से प्रभावित हुए हैं। ऊर्जा की कीमतों में उछाल के कारण शेयर बाजार, सोना, बॉन्ड और करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। तेल महंगा, हर चीज पर असर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं है। इससे खाने-पीने की चीजों की कीमत भी बढ़ रही है क्योंकि ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। उर्वरक (फर्टिलाइजर) की सप्लाई पर भी असर पड़ा है, जिससे खेती और खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकता है। शिपिंग कंपनियों ने डीजल महंगा होने के कारण अतिरिक्त शुल्क (सरचार्ज) लगाना शुरू कर दिया है। इससे सामान ढोने की लागत बढ़ गई है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। पर्यटन क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। हवाई ईंधन महंगा होने के कारण फ्लाइट टिकट महंगे हो गए हैं और कई रूट्स बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण दुनिया भर में कई जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित हुई है होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण दुनिया भर में कई जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई जहाज रास्ते में फंसे हुए हैं या देरी से पहुंच रहे हैं, जिससे बाजार में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। मध्य पूर्व से आने वाले एल्यूमीनियम की सप्लाई पर असर पड़ा है, जो निर्माण कार्यों के लिए जरूरी होता है। कतर से मिलने वाली हीलियम गैस, जो टेक्नोलॉजी और चिप निर्माण में इस्तेमाल होती है, उसकी सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। दक्षिण कोरिया जैसे देश नाफ्था (एक पेट्रोलियम उत्पाद) के निर्यात पर रोक लगा सकते हैं, दक्षिण कोरिया जैसे देश नाफ्था (एक पेट्रोलियम उत्पाद) के निर्यात पर रोक लगा सकते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू उपकरणों के उत्पादन पर असर पड़ेगा। प्लास्टिक और केमिकल इंडस्ट्री भी प्रभावित हो रही है क्योंकि ये कच्चे तेल पर निर्भर हैं। भारत से करीब 4 लाख टन बासमती चावल की खेप बंदरगाहों या रास्ते में फंसी हुई है, जिससे निर्यात प्रभावित हो रहा है। वहीं यूरिया जैसे उर्वरकों की सप्लाई पर भी असर पड़ा है, क्योंकि दुनिया की करीब एक-तिहाई सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। इसका सीधा असर खेती और खाद्य उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में खाद्य संकट की आशंका बढ़ सकती है। Post navigation विदेश मंत्री जयशंकर का मॉरिशस और UAE दौरा सीजफायर के बाद भारत ने होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को लाने की तैयारी शुरू