नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर मंगलवार को पलटवार किया। ट्रंप ने इतालवी समाचार पत्र को बताया कि वह मेलोनी के रवैये से दुःखी हैं।
मेलोनी ट्रंप की मुखर समर्थक रही हैं, लेकिन उन्होंने ईरान युद्ध संबंधी ट्रंप के फैसले की आलोचना की थी। मेलोनी ने ट्रंप द्वारा पोप लियो की आलोचना किए जाने को भी अस्वीकार्य बताया था।
ट्रंप से अलग मेलोनी की सोच
ट्रंप ने कोरिएरे डेला सेरा के साथ साक्षात्कार में कहा कि मेलोनी का सोच मेरे सोच से बहुत अलग था। ट्रंप ने ईरान द्वारा अवरुद्ध होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद करने से इनकार करने के लिए भी मेलोनी की निंदा की।
ऑनलाइन पोस्ट किए गए इतालवी लेख में उनके हवाले से कहा गया, ‘मैं मेलोनी से स्तब्ध हूं। मुझे लगा था कि उसमें साहस है, लेकिन मैं गलत था।’
व्हाइट हाउस ने इन बयानों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मेलोनी के कार्यालय ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पोप लियो पर मेलोनी की टिप्पणियों की निंदा के बारे में पूछे जाने पर, ट्रंप ने इसे अस्वीकार्य बताया और कहा, ‘मेलोनी को इस बात की परवाह नहीं है कि ईरान के पास परमाणु हथियार है और अगर उसे मौका मिले तो वह दो मिनट में इटली को उड़ा देगा।’
ट्रंप ने कहा, ‘वे (इटली) दुनिया में सबसे अधिक ऊर्जा लागत का भुगतान करते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए लड़ने को भी तैयार नहीं हैं। वे होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए डोनल्ड ट्रंप पर निर्भर हैं।’
इटली और अमेरिका के बीच बढ़ रहीं दूरियां
ट्रंप ने जिस तरह से मेलोनी पर पलटवार किया है उससे प्रतीत होता है कि दोनों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं। पिछले महीने ही उन्होंने कोरिएरे डेला सेरा को बताया था कि मेलोनी महान नेता हैं, लेकिन मंगलवार को उन्होंने उन पर ऊर्जा सुरक्षा और ईरान को लेकर अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करने में विफल रहने का आरोप लगाया।
मेलोनी को उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उनके घनिष्ठ संबंध देश और विदेश में उनकी स्थिति को मजबूत करेंगे, लेकिन इसके बजाय यह एक राजनीतिक बोझ बनने का खतरा पैदा कर रहा है। अब लगभग 66 प्रतिशत इतालवी अमेरिकी नेता के बारे में नकारात्मक राय रखते हैं।
सर्वेक्षणकर्ताओं का कहना है कि व्हाइट हाउस से मेलोनी के संबंधों के कारण पिछले महीने न्यायिक सुधार पर जनमत संग्रह में मेलोनी को हार का सामना करना पड़ा था। ईरान में चल रहे युद्ध ने इटली में ऊर्जा की कीमतों को बढ़ा दिया है, जो तेल और गैस आयात पर काफी हद तक निर्भर है।
इटली ने इजरायल के साथ रक्षा समझौता किया निलंबित
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इजरायल के साथ रक्षा सहयोग समझौते को निलंबित कर बड़ा संदेश दिया है। यह कदम उन दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास को उजागर करता है, जो अब तक यूरोप में इजरायल के मजबूत सहयोगियों में गिने जाते थे।
इटली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उसने हाल के हफ्तों में इजरायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई की खुलकर आलोचना की थी। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब इजरायली बलों ने संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत तैनात इतालवी सैनिकों के पास चेतावनी के तौर पर गोलीबारी की, जिससे एक सैन्य वाहन को नुकसान पहुंचा।
जहां मतभेद होते हैं, वहां कदम उठाना जरूरी
मेलोनी ने साफ कहा कि जहां मतभेद होते हैं, वहां कदम उठाना जरूरी होता है। उनके इस फैसले को एक बड़े कूटनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर तब जब उन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की भी आलोचना की थी। हालांकि इजरायली विदेश मंत्रालय ने इस फैसले को ज्यादा महत्व नहीं दिया।
मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक सुरक्षा समझौता नहीं, बल्कि एक पुराना समझौता ज्ञापन है, जिसका वास्तविक प्रभाव सीमित है और इससे इजरायल की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
रणनीति में बदलाव किया
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। रोम के लुइस विश्वविद्यालय में राजनीतिक इतिहासकार लोरेंजो कैस्टेलानी के अनुसार, मेलोनी को आशंका है कि इजरायल-ईरान तनाव और उसके आर्थिक असर को लेकर मतदाताओं का रुख बदल सकता है, इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
गौरतलब है कि यह रक्षा समझौता 2003 में सिल्वियो बर्लुस्कोनी के कार्यकाल में हुआ था, जो हर पांच साल में स्वत: नवीनीकरण के तहत चलता रहा है। अब इटली का यह कदम वैश्विक कूटनीति में नए समीकरणों के संकेत दे रहा है।
