नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : MSME : सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर को मजबूत करने के लिए फरवरी-मार्च 2026 के दौरान 92,000 करोड़ रुपए से अधिक की 5.27 लाख से ज्यादा गारंटियों को मंजूरी दी है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों के बीच यह कदम सेक्टर को सहारा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
उद्यम पंजीकरण में तेज उछाल
फरवरी-मार्च के दौरान 20 लाख से अधिक एमएसएमई ने ‘उद्यम’ पोर्टल पर नया रजिस्ट्रेशन कराया। इससे देश में कुल रजिस्टर्ड उद्यमों की संख्या 8 करोड़ के पार पहुंच गई है, जो बढ़ती उद्यमशीलता गतिविधियों को दर्शाता है।
कर्ज प्रवाह में मजबूत वृद्धि
एमएसएमई सेक्टर को दिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 36.7 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। इसमें तिमाही आधार पर 23.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में बेहतर क्रेडिट फ्लो का संकेत है।
बिना गारंटी लोन की सीमा बढ़ी
सरकार ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए बिना गारंटी लोन की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी है। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू हो चुकी है, जिससे छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स को बड़ा लाभ मिलेगा।
टी-आरईडीएस प्लेटफॉर्म पर तेज रफ्तार
ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टी-आरईडीएस) प्लेटफॉर्म पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। यह 2022 के 4,300 करोड़ रुपए से बढ़कर अब 7 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है। फरवरी-मार्च में ही 85,000 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ।
ऊर्जा और कच्चे माल की सप्लाई पर फोकस
सरकार ने औद्योगिक इकाइयों के लिए कमर्शियल एलपीजी की सीमा को बढ़ाया है, जिससे फार्मा, फूड, स्टील, सिरेमिक और अन्य सेक्टरों को फायदा मिलेगा। साथ ही, कोयला मंत्रालय ने अतिरिक्त कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिल सके।
एमएसएमई को मजबूत बनाने पर जोर
सरकार ने स्पष्ट किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद एमएसएमई सेक्टर को प्रतिस्पर्धी और मजबूत बनाने के लिए लगातार नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं और आगे भी यह प्रयास जारी रहेंगे।
