महापुरुषों को जाति में मत बांटिए, हिंदू बंटेंगे तो विधर्मी उठाएंगे लाभ-CM योगी

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लखनऊ, डॉ.जितेंद्र बाजपेयी : CM visited Ram Lalla: सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धर्म ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव व श्रीरामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती भी उतारी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम हमें जोड़ने के माध्यम बने हैं। श्रीराम उत्तर को दक्षिण से और श्रीकृष्ण पूरब को पश्चिम से जोड़ रहे हैं। इसी प्रकार भगवान शंकर द्वादश ज्योतिर्लिंग के माध्यम से भारत के कण-कण को जोड़ रहे हैं। ये तीनों भारत को जोड़ने की शक्ति हैं और यही हमारी भी सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. लोहिया कहते थे कि श्रीराम, श्रीकृष्ण व शिवशंकर हैं तो कोई भारत का बाल बांका नहीं कर सकता, लेकिन यह बात उनके शिष्य नहीं समझेंगे, क्योंकि समझ उन्हें आता है, जिनमें समझ का सामर्थ्य होता है। जिनमें समझ का सामर्थ्य नहीं, उन रामद्रोहियों-शिवद्रोहियों के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं होगा।

जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय ही होगी 

सीएम ने गर्व से कहा कि इतने बड़े आंदोलन ने बता दिया कि जहां अयोध्या होगी और जहां राम होंगे, वहां विजय होगी। सम-विषम परिस्थितियों में हम न रुकेंगे, न झुकेंगे, न डिगेंगे और लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे। दुनिया अयोध्या धाम का अनुसरण कर रही है। सीएम ने नई अयोध्या की स्थिति का भी जिक्र किया। कहा कि नई अयोध्या त्रेतायुग की याद दिला रही है और यही डबल इंजन की ताकत है। यह तभी हो पाया, जब एक साथ एक स्वर में सनातन धर्मावलंबी बोल उठे, तभी रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया था। 

महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए
सीएम ने लोगों से आग्रह किया कि सनातन धर्म की एकता के जरिए भारत की एकता व अखंडता को मजबूती दीजिए। महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए और बांटने वालों से सावधान रहिए। यह वही पाप कर रहे हैं, जो मध्यकाल में देश को बांटने और समाज की एकता को खंडित करने वालों ने किया था। बांटने का पाप देशद्रोह से कम नहीं है। यह पाप कभी मत होने दें। जिस दिन 140 करोड़ भारतवासी अपने नेतृत्व पर विश्वास करते हुए बढ़ेंगे, दुनिया उनके सामने बाधक नहीं बन सकती।

प्रभु का मंदिर बने और हम अपनी आंखों से देख सकें

सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण अभियान है। भारत व दुनिया में जहां भी सनातन धर्मावलंबी रहा, वह गिरिवासी, वनवासी, वंचित, भिक्षावृत्ति से जीवन यापन करने वाला हो या राजमहल जैसे प्रासाद में रहने वाला बड़ा उद्यमी, सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु राम का भव्य मंदिर बने और वह इसे अपनी आंखों से देख सके। पीढ़ी दर पीढ़ी चली गईं, संघर्ष व आंदोलन बढ़ता गया। महिला, पुरुष, बच्चे, युवा समेत समाज के हर तबके ने, सनातन धर्म की हर उपासना विधियों से जुड़े लोगों ने लगातार 500 वर्ष तक संघर्ष किया। एक दिन वह काली रात आई थी, जब प्रभु श्रीराम के मंदिर को अपवित्र करके विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया, लेकिन 1528 से बिना किसी रोक-टोक या भय के कोई दिन ऐसा नहीं रहा होगा, जब सनातन धर्मावलंबियों ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए सोचा न हो और कुछ करने की इच्छाशक्ति के साथ अभियान का हिस्सा न बनें हो। 

देश के हर कोने में लोग जयश्रीराम कहते हैं 

सीएम योगी ने कहा कि प्रभु जब अपना काम कराना चाहते हैं, तभी सफलता प्राप्त होती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जब 1983 में आंदोलन को अपने हाथों में लिया तो आंदोलन चरम की ओर बढ़ता गया। अशोक सिंहल जी ने बिखरी हुई ताकत को एक किया। इस आंदोलन में क्षेत्र, जाति, भाषा की दीवारें टूटी हैं। आज भी देश के किसी कोने में हम जाते हैं तो उसके प्रभाव को महसूस करते हैं। अरुणाचल या ओडिशा, नगालैंड हो या मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड का सुदूर कोना, पश्चिमी-पूर्वी, उत्तरी-दक्षिण, मध्य भारत हो या छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसा जनजाति क्षेत्र, जैसे ही लोग हमें देखते हैं, वे सबसे पहले जयश्रीराम कहते हैं। मैं पश्चिम बंगाल के चुनाव में दूरदराज के गांवों में गया। वहां भी सड़कों पर आकर महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी ने जयश्रीराम से अभिवादन किया। 

जिस दिन राम मंदिर का फैसला आया, वह भारत के इतिहास का सबसे खुशहाल दिन 
सीएम योगी ने कहा कि हम सभी गुलामी का ढांचा हटने और आंदोलन के साक्षी हैं। जब उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से रामजन्मभूमि का फैसला दिया तो देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी झूम उठे। कुछ लोग धमकाते थे कि राम जन्मभूमि का फैसला आएगा तो यह होगा-वह होगा। ये वही लोग हैं, जो वकील खड़ा करते थे, रामसेतु को तोड़ना चाहते थे, रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे और चाहते थे कि समस्या का समाधान न निकले और सनातन धर्मावलंबी अपमानित हो, लेकिन जब उच्चतम न्यायालय ने सनातन धर्म की भावनाओं के अनुरूप साक्ष्यों के आधार पर सर्वसम्मति से फैसला किया तो देश-दुनिया ने भी उसका स्वागत किया। जिस दिन यह फैसला आया, वह भारत के इतिहास के सबसे शांत और खुशहाल दिन में से एक था।  

जब मंदिर बना तो हर आंख में थे खुशी के आंसू

सीएम योगी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति आंदोलन करती थी तो लोग पूछते थे क्या मंदिर बन जाएगा, तब संत कहते थे कि हां मंदिर बनेगा। दुनिया जब कोविड से त्रस्त थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों से 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन, 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। 23 जनवरी को 5 लाख लोग एक साथ आए। कोई पिलर को पकड़कर, कोई जमीन पर लेटकर तो कोई कहीं बैठकर खुशी से झूम रहा था। आंखों में खुशी के आंसू थे। देश-दुनिया प्रसन्न थी। 25 नवंबर को श्रीराम जन्मभूमि पर सनातनी भगवा ध्वजारोहण हुआ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक जी भी प्राण-प्रतिष्ठा व ध्वजारोहण कार्यक्रम में रहे। राष्ट्रपति के कर-कमलों से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (19 मार्च 2026) को मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना हुई। 

हम बंटे थे तो विधर्मियों ने लाभ उठाया

सीएम ने सनातनियों को चेताया कि जब हम बंटे थे तो विधर्मियों ने आकर लाभ उठाया था, हम आज एकजुट होकर मुकाबला कर रहे हैं तो सुरक्षित हैं। हम भावी पीढ़ी को गौरव से बता पाएंगे कि हमने श्रीरामजन्मभूमि का फैसला, भूमि पूजन, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, रामनवमी के दिन सूर्य तिलक, सनातनी ध्वजा का आरोहण, श्रीराम यंत्र की स्थापना को अपनी आंखों से देखा है। आने वाली पीढ़ियां हमें कोसेंगी नहीं। हम इसकी कीमत वर्तमान व भावी पीढ़ी को भी बताएं, दुनिया के लोग शोध कर रहे हैं कि कैसे यह आंदोलन चला और सफलता पर सफलता प्राप्त होती गई।

यह भारत के गौरव को बढ़ाने वाली पताका
सीएम योगी ने कहा कि यहां भगवान शिव के मंदिर पर भी ध्वज आरोहण हुआ है। भगवान शिव के मंदिर में भारत के सनातन धर्म की यह भगवा पताका भारत के गौरव को बढ़ाने वाली है। लंका जाने के पहले भगवान श्रीराम ने रामेश्वरम में शिव की आराधना की थी। भगवान शिव पार्वती मां को भगवान राम की कथा सुनाते हैं और राम जी अपने अभियान का हिस्सा बनने के लिए भगवान शिव की आराधना करते हैं। 

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