नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क : पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हार मिली है और भारतीय जनता पार्टी को जीत। मौके को देख भारत के पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने भी बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने टीएमसी का दामन छोड़ दिया है।
मनोज टीएमसी से विधायक थे और बंगाल सरकार में खेल मंत्री भी रह चुके हैं। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद मनोज ने कहा है कि उनका और टीएमसा का चैप्टर अब बंद हो चुका है। उन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी पर टिकट के बदल नोट मांगने के आरोप भी लगाए हैं।
मनोज नहीं हैं हैरान
मनोज ने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनावों में जो हुआ उससे वह हैरान नहीं हैं क्योंकि एक दिन ये होना ही था। मनोज ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, “देखिए, मैं इस हार से बिल्कुल भी हैरान नहीं हूं। जब एक पार्टी पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो और किसी भी सेक्टर में कोई विकास नहीं हो तो, ये होना ही था।”
मनोज ने कहा, “जो लोग भारी भरकम रकम दे सकते थे वो ही टिकट खरीद सकते थे। इस बार 70-72 लोगों ने टिकट के बदले पांच करोड़ रुपये दिए हैं। मुझसे भी कहा गया था, लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। जरा देखिए कि जिन लोगों ने टिकट के बदले पैसे दिए तो वह जीत पाए हैं या नहीं। जहां तक टीएमसी की बात है तो, मेरे लिए ये चैप्टर खत्म हो गया है।”
चुनाव लड़ने की की थी जिद
मनोज ने कहा कि उनको ममता बनर्जी ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था, लेकिन ममता ने जिद की थी इसलिए 2021 में वह विधानसभा चुनाव लड़ने को राजी हो गए थे। मनोज ने कहा, “उस समय मैं पंजाब किंग्स के लिए आईपीएल खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी भी खेल रहा था। तभी दीदी (ममता बनर्जी) चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लडूं। मैंने विनम्रता से मना कर दिया, लेकिन 2021 चुनावों में दीदी ने मुझसे फिर चुनाव लड़ने को कहा मुझसे शिबपुर से लड़ने को कहा गया। मुधे लगा कि मैं बदलाव कर सकता हूं तो मैंने चुनाव लड़ा।”
