डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली : चीन के नियंत्रण वाले हंबनटोटा बंदरगाह के पास स्थित हवाई अड्डे का नियंत्रण विदेशी निवेशकों को सौंपने के श्रीलंका के फैसले पर भारत बारीकी से नजर रख रहा है। यह हिंद महासागर में रणनीतिक पकड़ बनाने की इच्छुक भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।
श्रीलंकाई सरकार ने 30 साल के लिए हंबनटोटा स्थित मट्टाला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नियंत्रण लेने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से नौ जून तक एक्सप्रेशंस ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किए हैं।
हंबनटोटा बंदरगाह पर नियंत्रण चाहता है भारत
2017 में, चीन ने 99 साल के पट्टे पर रणनीतिक हंबनटोटा बंदरगाह पर नियंत्रण हासिल कर लिया था, जिससे नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ गई थीं। नई दिल्ली इस नए अवसर को बड़ी उत्सुकता से देख रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले साल अप्रैल में द्वीप राष्ट्र की यात्रा के बाद दोनों पड़ोसी देशों ने अधिक व्यापार और रणनीतिक संबंध बनाने की कोशिश की है।
2013 में शुरू की गई इस परियोजना की लागत 209 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी, जिसका वित्तपोषण मुख्य रूप से चीन के निर्यात-आयात बैंक द्वारा किया गया था।
हालांकि, यह व्यावसायिक रूप से सफल होने के लिए आवश्यक यात्री संख्या को आकर्षित करने में विफल रहा। कई वर्षों तक उपेक्षित रहने के बाद इसे विश्व स्तर पर दुनिया का सबसे खाली हवाई अड्डा कहकर उपहास उड़ाया गया।
अब, श्रीलंका की सरकार ने नया एक्सप्रेशंस ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक निवेशकों को हवाई अड्डे का अधिग्रहण करने, इसे संचालित करने और इसे एक आधुनिक विमानन केंद्र में बदलने के लिए आमंत्रित किया गया है।
