Islamic देशों को भी इजरायल से रिश्ते सामान्य करने चाहिए – ट्रंप

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‘इस्लामिक देशों को भी इजरायल से रिश्ते सामान्य करने चाहिए’, ट्रंप ने ईरान से सुलह को अब्राहम समझौते से जोड़ा

 नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क :अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित सुलह को अब्राहम समझौते से जोड़ते हुए कहा है कि खाड़ी और इस्लामिक देशों को इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। दोनों पक्षों के बीच 14 बिंदुओं वाले समझौता मसौदे पर सहमति बनाने के लिए कतर में बातचीत चल रही है।

इस बीच, ईरान ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटे के दौरान 32 मालवाहक जहाज और पांच तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए हैं। खाड़ी में समझौते की उम्मीद बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। तेल के दाम दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए और 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए।

ट्रंप मे मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की

रायटर्स के अनुसार, ट्रंप ने सोमवार को अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र, जार्डन और तुर्किये समेत कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने इन देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की। हालांकि, क्षेत्रीय शक्ति माने जाने वाले सऊदी अरब ने भी अब तक इस समझौते में शामिल होने के संकेत नहीं दिए हैं।

वहीं, पाकिस्तान को भी इजरायल से दिक्कत है। हालांकि, मिस्र और जार्डन पहले से ही इजरायल के साथ राजनयिक संबंध बनाए हुए हैं। ट्रंप की टिप्पणी पर इजरायल की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौता करता है, तो उसे भी इस “ऐतिहासिक वैश्विक गठबंधन” का हिस्सा बनने का सम्मान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से पश्चिम एशिया की जटिल परिस्थितियों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ वार्ता अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत विफल रही तो नए हमले हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि या तो यह सभी के लिए बड़ा समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा।

मध्यस्थता में कतर से पिछड़ा पाकिस्तान

एपी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री और शीर्ष वार्ताकार सोमवार को कतर पहुंचे, जहां उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री के साथ अमेरिका के साथ संभावित शांति समझौते पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, बातचीत का मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और ईरान के उच्च स्तर के समृद्ध यूरेनियम भंडार पर रहा।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि समझौता तुरंत होने वाला है। उन्होंने बताया कि संभावित समझौते के मसौदे में 14 बिंदु शामिल हैं, जिनमें युद्ध खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

ईरान ने कहा है कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से कोई शुल्क नहीं लेगा, लेकिन सुरक्षा और नेविगेशन जैसी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था की जा सकती है।

अब्राहम समझौते से पाकिस्तान को होगी दिक्कत

बता दें कि अब्राहम समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल में शुरू हुई पहल है, जिसके तहत अरब देशों और इजरायल के बीच संबंध सामान्य बनाने पर जोर दिया गया था। इसके तहत सभी पक्षों को व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और रणनीतिक समन्वय को प्राथमिकता देना होगा। 2020 में यूएई और बहरीन ने इजरायल के साथ संबंध स्थापित किए थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए।

उधर, पाकिस्तान को ट्रंप की अपील से परेशानी होने लगी है क्योंकि वह इजरायल को मान्यता नहीं देता। पाकिस्तान की मांग है कि पहले फलस्तीन को 1967 से पहले की स्थिति के अनुरूप एक देश के रूप में मान्यता दी जाए।

ऐसे में यदि अब्राहम समझौता लागू होता है तो पाकिस्तान और खाड़ी देशों के बीच संबंधों पर असर पड़ सकता है क्योंकि पाकिस्तान के यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ सामरिक संबंध हैं। साथ ही घरेलू मोर्चे पर भी पाकिस्तान को व्यापक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।