नई दिल्ली, संवाददाता : दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की दिल्ली जिमखाना क्लब, इंडियन पोलो क्लब और दिल्ली रेस क्लब की मूल्यवान जमीन से जुड़ी योजना पर कड़े सवाल पूछे हैं। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने साफ कहा, प्रदूषण से पहले ही घुट रही दिल्ली की सांसें अब और भी छोटी हो जाएंगी, क्योंकि नई दिल्ली नगर पालिका क्षेत्र की बची-खुची हरी-भरी जगहों को भी सरकार ले रही है। थोड़ी-बहुत सांस लेने की जगह बची है, वह भी चली जाएगी। हम सब घुटकर मर जाएंगे। दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने केंद्र से पूछे कई सवालजस्टिस कृष्णा ने इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, पोलो क्लब क्यों चाहिए आपको? जिमखाना जैसे हेरिटेज स्ट्रक्चर्स का क्या करेंगे? क्या 20 मंजिला इमारतें बनाएंगे? दिल्ली को क्या बनाना चाहते हैं? पिछले 200 साल में जमीन नहीं चाहिए थी, अब अचानक क्यों? केंद्र सरकार ने 20 मई को जयपुर पोलो ग्राउंड (रेस कोर्स) खाली करने का नोटिस जारी किया था। एसोसिएशन ने पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन स्टे नहीं मिलने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट को 10 जून तक खाली करने के नोटिस पर स्टे एप्लीकेशन का फैसला करने का निर्देश दिया हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट को 10 जून तक खाली करने के नोटिस पर स्टे एप्लीकेशन का फैसला करने का निर्देश दिया। पोलो क्लब को बीस जून तक खाली किए जाने का नोटिस दिया गया है। बहुमंजिला इमारतों में सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगाकेंद्र सरकार के स्थायी वकील अशीष दीक्षित ने दलील दी, यह जमीन सार्वजनिक व रक्षा प्रयोजनों के लिए जरूरी है। न्यायमूर्ति कृष्णा ने सरकार के तर्क को खारिज करते हुए पूछा-हाइराइज बनाना कैसे जनहित में है? हाइराइज इमारतों से भरी दिल्ली में अब सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। भगवान सबको बचाए, अगर यही दिल्ली में रहने का तरीका है। Post navigation 7 किलो सोने के जेवरों के साथ 3 लोग पकड़े, नेपाल भागने की फिराक में थे