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जबलपुर, संवाददाता :  काशी विश्वनाथ धाम की यात्रा के दौरान वन्दे भारत ट्रेन में पी गई एक कप इंस्टेंट चाय ने जबलपुर के युवा उद्यमी इंद्रजीत कुंडे की जिंदगी बदल दी।

चायपत्ती, शक्कर और मिल्क पाउडर के साथ कई प्रयोग शुरू किए

इंद्रजीत बताते हैं कि काशी से लौटने के बाद उन्होंने चायपत्ती, शक्कर और मिल्क पाउडर के साथ कई प्रयोग शुरू किए। शुरुआती प्रयास असफल रहे, लेकिन लगभग एक वर्ष तक लगातार शोध और परीक्षण के बाद वे सही कंपोजिशन तैयार करने में सफल हुए।

प्राकृतिक मसाला और इलायची जैसे तत्वों का उपयोग किया

उत्पाद को पूरी तरह प्राकृतिक बनाए रखने के लिए मसाला और इलायची जैसे तत्वों का उपयोग किया गया तथा इसमें किसी भी प्रकार के प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम फ्लेवर का इस्तेमाल नहीं किया गया।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की जानकारी मिली

शुरुआत में पैकेजिंग हाथों से की जाती थी, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती थी। इसी दौरान उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की जानकारी मिली।

कारोबार हर महीने डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपये तक पहुंच चुका

उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में आवेदन करने के बाद अक्टूबर 2025 में उन्हें पैकेजिंग मशीन प्राप्त हुई। लगभग 3.08 लाख रुपये लागत वाली मशीन पर 35 प्रतिशत सब्सिडी मिलने से उत्पादन और पैकेजिंग की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ। आज इंद्रजीत का कारोबार हर महीने डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपये तक पहुंच चुका है।