न्यूयॉर्क, डिजिटल डेस्क : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के मंच पर भारत ने महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना के क्षेत्र में अपनी वैश्विक धाक जमाई है। सुरक्षा परिषद में ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ विषय पर आयोजित खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने दुनिया को दिखाया कि जब महिलाओं को राजनैतिक, सामाजिक और वित्तीय रूप से सशक्त किया जाता है, तो देश कैसे बदलता है। यूएन मंच पर भारत ने दिखाई महिला सशक्तिकरण की ताकत स्थानीय सरकार से संसद तक नारी शक्ति का परचम भारत ने वैश्विक मंच पर गर्व से साझा किया कि देश की स्थानीय स्वशासी संस्थाओं में संवैधानिक आरक्षण के कारण आज 10 लाख से अधिक महिलाएं निर्वाचित होकर नेतृत्व कर रही हैं। स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी एक-तिहाई से अधिक हो चुकी है। इस ऐतिहासिक सफर को और आगे बढ़ाते हुए ‘महिला आरक्षण अधिनियम 2023’ के जरिये अब इस व्यवस्था को भारत की संसद तक बढ़ा दिया गया है। राजदूत पर्वतनेनी ने रेखांकित किया कि भारत का नेतृत्व हमेशा से उच्च पदों पर बैठी सशक्त महिलाओं ने किया है, चाहे वह देश की शासनाध्यक्ष (प्रधानमंत्री) का पद हो या लोकसभा अध्यक्ष। आज भारत का यह गौरव और बढ़ जाता है कि देश के शीर्ष पद पर यानी राष्ट्रप्रमुख के रूप में एक प्रतिष्ठित महिला (राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु) विराजमान हैं। इसके साथ ही भारतीय सशस्त्र बलों में भी महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। शांति स्थापना और वैश्विक मिशनों में भारतीय वीरांगनाएं वैश्विक मोर्चे पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में वर्दीधारी महिलाओं की तैनाती को ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ एजेंडे का सबसे जीवंत उदाहरण बताया। भारत वह पहला देश था जिसने वर्ष 2007 में लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए पूरी तरह से महिला पुलिस इकाई को भेजा था। इस कदम ने हजारों लाइबेरियाई महिलाओं को अपनी राष्ट्रीय पुलिस में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान में 160 से अधिक भारतीय महिला शांतिदूत दुनिया के विभिन्न यूएन मिशनों में मुस्तैदी से तैनात हैं वर्तमान में 160 से अधिक भारतीय महिला शांतिदूत दुनिया के विभिन्न यूएन मिशनों में मुस्तैदी से तैनात हैं। वे न केवल स्थानीय समुदायों में विश्वास जगा रही हैं, बल्कि लैंगिक हिंसा से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भारतीय महिला शांतिदूतों की इसी प्रतिबद्धता को यूएन ने भी सराहा है, जिसके तहत उन्हें 2019, 2024 में और हाल ही में (वर्ष 2026) मेजर अभिलाषा बड़क को ‘यूएन जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। भारत सिर्फ अपनी सीमाओं में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महिला सैन्य अधिकारियों को तैयार कर रहा है। दिल्ली में भारतीय सेना द्वारा स्थापित ‘सेंटर फॉर यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग’ 2016 से दुनियाभर की महिला सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षित कर रहा है। भारत ने फरवरी 2025 में ‘ग्लोबल साउथ’ की महिला शांतिदूतों के लिए एक सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें 35 देशों की महिलाओं ने हिस्सा लिया। इसके बाद अगस्त 2025 में ‘यूएन वीमेन मिलिट्री आफिसर्स कोर्स’ का भी आयोजन किया गया। Post navigation भारत में नक्काशी किए पत्थरों से फ्रांस में बन रहा पहला हिंदू मंदिर दुर्घटना की शिकार महिला की मदद को दी अपनी धोती, ‘हीरो’ बना चायवाला