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चाईबासा, संवाददाता : झारखंड में माओवादियों के खिलाफ निर्णायक अभियान के बीच अब सुरक्षा एजेंसियों का सबसे बड़ा निशाना एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा बन गया है।

खुफिया जानकारी के मुताबिक वह लगातार ठिकाना बदलते हुए अपने गृह जिला गिरिडीह पहुंचने की कोशिश में है। मिसिर बेसरा दो माह पहले ही सारंडा के जंगलों से सुरक्षित निकल भागा था।

वह फिलहाल टोंटो और गोइलकेरा के जंगलों में छिपा हुआ है। उसकी कोशिश है कि वह अपने गृह जिले गिरिडीह तक सुरक्षित पहुंच जाए। पारसनाथ की पहाड़ियां कभी उसका ठिकाना हुआ करती थी।

फिलहाल सारंडा में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बाद वह कभी कोल्हान तो कभी गिरिडीह की ओर मूवमेंट कर रहा है। मिसिर बेसरा की गतिविधियों के मद्देनजर कोल्हान से लेकर बोकारो-गिरिडीह सीमा तक संयुक्त अभियान और निगरानी तेज कर दी गई है।

सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि यदि मिसिर बेसरा गिरफ्तार होता है या आत्मसमर्पण करता है तो झारखंड में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगेगा।

इसी कारण पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो और गिरिडीह से जुड़े सीमावर्ती जंगलों में उसे पकड़ने के लिए लगातार संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।

नकद 14-15 करोड़ और सोना है मिसिर बेसरा के पास

जानकारी मिली है कि गिरिडीह निवासी मिसिर बेसरा के पास संगठन की लेवी के करीब 14-15 करोड़ रुपये और कुछ मात्रा में सोना है।

आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल उसके आत्मसमर्पण की संभावना कम मान रही हैं। वह लगातार अपने 10-12 विश्वस्त साथियों के साथ लगातार ठिकाने बदल रहा है।

मिसिर बेसरा अपने करीबी सहयोगी मेहनत उर्फ मोछू के साथ पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो और गोइलकेरा थाना क्षेत्र के घने जंगलों में सक्रिय है।

मिसिर की तलाश में कोबरा की विभिन्न बटालियन, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। जंगलों में ड्रोन, तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया तंत्र के जरिए उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।