PoK में हत्याओं के बीच जुटे 1.5 लाख प्रदर्शनकारी, इस्लामाबाद को दी 21 जुलाई तक की डेडलाइन नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच तनाव और बढ़ गया है। स्थानीय सूत्रों और सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि आंदोलन को हिंसक दिखाने, अफरातफरी फैलाने और प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने के लिए असामाजिक तत्वों को प्रदर्शन स्थलों पर भेजने की योजना बनाई गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में एक व्यक्ति को प्रदर्शन स्थल पर संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वह खुद को पुलिस अधिकारी बताकर भीड़ में शामिल हुआ था और उसके पास भारतीय मुद्रा बरामद हुई। दावा किया गया कि पूछताछ में उसने बताया कि उसे यह मुद्रा प्रदर्शन स्थल पर छोड़ने के लिए दी गई थी, ताकि बाद में आंदोलन को भारत समर्थित बताने का नैरेटिव बनाया जा सके। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने दोहराया है कि उसका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। संगठन का कहना है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के बावजूद प्रदर्शनकारी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाएंगे। जेएएसी ने आरोप लगाया कि यदि आंदोलन में हिंसा होती है तो उसका दोष प्रदर्शनकारियों पर मढ़ने की कोशिश की जा सकती है। पाकिस्तान सरकार पहले ही इन प्रदर्शनों को बाहरी समर्थन प्राप्त होने का आरोप लगा चुकी है सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार पहले ही इन प्रदर्शनों को बाहरी समर्थन प्राप्त होने का आरोप लगा चुकी है। वहीं, स्थानीय आंदोलनकारी इसे जनता की महंगाई, बिजली दरों और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ स्वतःस्फूर्त जनआंदोलन बता रहे हैं। पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों को उग्र दिखाने के प्रयास में है ताकि इसके जरिये वह दमनात्मक कार्रवाइयों को उचित ठहरा सके। इस बीच, पाकिस्तान आर्थिक संकट, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा चुनौतियों से भी जूझ रहा है। ऐसे में पीओजेके में बढ़ता जनाक्रोश इस्लामाबाद के लिए नई चुनौती बन गया है। 21 जुलाई तक स्थगित किया ‘लांग मार्च’ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने मुजफ्फराबाद की ओर प्रस्तावित ‘लांग मार्च’ को फिलहाल 21 जुलाई तक स्थगित कर दिया है। संगठन ने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर कार्रवाई के लिए यह “आखिरी मौका” दिया जा रहा है। बताया गया कि पाकिस्तानी अधिकारियों और जेएएसी नेताओं के बीच बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई तो 22 जुलाई से लांग मार्च फिर शुरू किया जाएगा, जबकि क्षेत्र में चल रहे धरने जारी रहेंगे। Post navigation SC के आदेश के बाद नमाज पर संशय, 13 बीघा जमीन को लेकर दोनों पक्षों में ठनी H-1B वीजा धारक अमेरिकियों के लिए पैदा करते हैं नौकरियां- अमेरिकी सांसद