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धार,संवाददाता : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला से लगी करीब 13 बीघा भूमि विवाद का केंद्र बन गई है। मस्जिद पक्ष इस जमीन को कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी की बताते हुए यहां नमाज की व्यवस्था की उम्मीद कर रहा है, जबकि मंदिर पक्ष मस्जिद पक्ष के दावे को खारिज कर इसे शासकीय भूमि बता रहा है। ऐसे में, सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब शुक्रवार की नमाज को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश और नमाज की व्यवस्था का निर्देश

उल्लेखनीय है कि गत 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इन्कार कर दिया, जिसमें भोजशाला परिसर को वाग्देवी का मंदिर माना गया था। इसके साथ ही अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक भोजशाला परिसर के बाहर किसी उपयुक्त खुली जगह पर नमाज अदा करने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।

आदेश की प्रति न मिलने से प्रशासनिक कार्रवाई अटकी

गुरुवार शाम तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं होने से जिला प्रशासन ने नमाज के लिए भूमि चयन या नई व्यवस्था की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आदेश का विधिक परीक्षण और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।

13 बीघा जमीन पर गहराया नया विवाद

इसी बीच, मस्जिद पक्ष के इस दावे पर नया विवाद उत्पन्न हो गया है, जिसमें उसने कहा है कि भोजशाला से लगी 13 बीघा भूमि कमाल मौलाना सोसायटी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, यहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा सकता है। वहीं, मंदिर पक्ष से जुड़े लोगों ने इस जमीन पर मुस्लिम पक्ष के दावे को तथ्यहीन बताते हुए कहा है कि संबंधित भूमि शासकीय है। उल्लेखनीय है कि मंदिर पक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) द्वारा संरक्षित भोजशाला परिसर के 300 मीटर दायरे में नमाज की अनुमति स्वीकार नहीं होगी। ऐसे में यदि यह भूमि उसी दायरे में आती है, तो यह विवाद और गहरा सकता है

मस्जिद पक्ष का दावा

कमाल मौलाना के नाम दर्ज लगभग 13 बीघा भूमि हमारी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। अभी तक प्रशासन की ओर से भी कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया गया है। – अब्दुल समद, सदर, कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी

मंदिर पक्ष का दावा

कमाल मौलाना के नाम पर यहां भूमि होने का कोई आधार नहीं है। संबंधित भूमि शासकीय है। भोजशाला के 300 मीटर दायरे में किसी निजी स्वामित्व के दावे की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेख ही स्पष्ट करेंगे। – गोपाल शर्मा, संयोजक, भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति

अभी कहां होती है नमाज ?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 15 मई 2026 के आदेश के बाद से भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज अदा नहीं की जा रही है। इसके बाद से सभी अपने-अपने मोहल्लों की अलग-अलग मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं। कोई विशेष स्थान नहीं है।