रायपुर,संवाददाता : महादेव सट्टा एप के संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में अजंता मेंडिस के नाम से छिपा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच में एक फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का राजफाश हुआ है। इसमें उसकी तस्वीर है, लेकिन नाम अजंता मेंडिस दर्ज है। यह नाम श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर से मिलता-जुलता है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूर्व क्रिकेटर का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। जांच एजेंसियों के अनुसार, चंद्राकर ने इस फर्जी पासपोर्ट के जरिये ओमान में प्रवेश किया। पासपोर्ट में उसे 11 मार्च, 1998 को जन्मा दक्षिण-पूर्व एशियाई नागरिक दर्शाया गया है। इसके अलावा, चंद्राकर और उसके सहयोगी ने पहले वानूआतू की नागरिकता भी हासिल की थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 दर्ज है। यह पासपोर्ट 21 जून 2034 तक वैध बताया गया है। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इस फर्जी पहचान का उपयोग किस नेटवर्क के जरिये किया गया। फर्जी पासपोर्ट का यह मामला चंद्राकर के भारत प्रत्यर्पण को प्रभावित कर सकता है। ओमान के कानून के अनुसार, पहले वहां की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी। बता दें कि चंद्राकर वर्ष 2023 से फरार था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने उसके खिलाफ मनी लांड्रिंग के आरोप लगाए हैं। Post navigation सिंधु जल समझौते का भविष्य पाक की ओर से आतंकवाद खत्म करने पर निर्भर ऋतुराज गायकवाड़ को टूर्नामेंट के लिए सौंपी गई कप्तानी