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नई दिल्ली,एजेंसी : Electric Vehicles Policy : केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उसकी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति केवल खरीद पर मिलने वाली छूट (सब्सिडी) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए डिमांड-साइड और सप्लाई-साइड दोनों को मजबूत करने वाला स्ट्रक्चरल रोडमैप है।

लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि FAME-II और PM E-DRIVE जैसी योजनाएं तो शुरुआती लागत घटाने पर फोकस करती हैं, लेकिन PLI स्कीम्स के जरिए घरेलू विनिर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।सरकार का जोरमंत्री ने आगे बताया कि Phased Manufacturing Programme (PMP) के तहत EV कंपोनेंट्स के स्वदेशीकरण (indigenisation) को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि EV इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बाजार निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दोनों पर भारी निवेश किया जा रहा है।

प्रमुख योजनाओं का बजट

– FAME-II स्कीम: 11,500 करोड़ रुपये
– PM E-DRIVE: 10,900 करोड़ रुपये
– ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स PLI स्कीम: 25,938 करोड़ रुपये
– ACC बैटरी PLI स्कीम: 18,100 करोड़ रुपये
– PM e-Bus PSM: 3,435.33 करोड़ रुपये

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि EV अपनाने के लिए 2047 तक कोई निश्चित लक्ष्य तय नहीं किया गया है। हालांकि, कई केंद्रीय योजनाओं (FAME, PM E-DRIVE, PLI, SPMEPCI आदि) के जरिए EV को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई राज्य सरकारें भी केंद्र की इन पहलों के साथ मिलकर अपनी EV नीतियां चला रही हैं। केंद्र का जोर है कि EV पॉलिसी सिर्फ इंसेंटिव देने से आगे जाकर स्वदेशी उत्पादन, टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक सस्टेनेबल मोबिलिटी का मजबूत ढांचा तैयार कर रही है।