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आगरा, संवाददाता : चंबल सेंक्चुअरी में संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जहां घड़ियाल, इंडियन स्किमर, मगरमच्छ और डॉल्फिन जैसी दुर्लभ प्रजातियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन्यजीवों की बढ़ती आबादी के साथ चंबल क्षेत्र ईको टूरिज्म का प्रमुख केंद्र भी बनता जा रहा है।

चंबल की गोद दुनिया में लुप्तप्राय जीव-जंतुओं के लिए जीवन रेखा बन कर उभरी है। घड़ियाल, मगरमच्छ, इंडियन स्किमर, बटागुर कछुए एवं डॉल्फिन की बढ़ती संख्या ने यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को चार चांद लगा दिए हैं। 1979 में चंबल नदी को लुप्तप्राय घड़ियालों के संरक्षण के लिए चुना गया था। उस समय घड़ियालों की आबादी 250 थी, जो अब 11 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 2,938 हो गई है।

एक साल में मगरमच्छ 928 से बढ़कर 1,512 हो गए हैं। इंडियन स्किमर जो वर्ष 2015 में लुप्तप्राय स्थिति में थे, उनकी संख्या 224 से बढ़कर 1000 हो गई है। 5 अक्तूबर 2009 में डॉल्फिन के संरक्षण के लिए साफ पानी वाली चंबल नदी को चुना गया। एक साल में डॉल्फिन की संख्या 111 से बढ़कर 155 हो गई है। बटागुर कछुओं की साल एवं ढोर प्रजाति भी यहां मौजूद हैं।

चंबल नदी में दुर्लभ इंडियन स्किमर एवं बटागुर कछुओं की लुप्तप्राय प्रजातियों के पुनरुद्धार को देखा

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की पूर्व बेला पर संवाददाता ने चंबल का दौरा किया और चंबल नदी में दुर्लभ इंडियन स्किमर एवं बटागुर कछुओं की लुप्तप्राय प्रजातियों के पुनरुद्धार को देखा। बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि बाह रेंज में भी एक वर्ष में जलीय एवं वन्यजीवों की संख्या में हुई उल्लेखनीय वृद्धि विभाग के लिए उत्साहजनक रही है। बीहड़ में चीतल, सांभर, तेंदुए भी बढ़ रहे हैं। बताया कि मानव वन्यजीव संघर्ष टालने के लिए नियमित रूप से नदी क्षेत्र के ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

ईको टूरिज्म का हब बन रहीं बीहड़ की वादियां
बीहड़ की वादियां ईको टूरिज्म का हब बनकर उभर रही हैं। चंबल की प्राकृतिक खूबसूरती में गूंजता चिड़ियों का मधुर कलरव, जलीय जीवों की अठखेलियां एवं वन्यजीवों का रोमांच इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी आदि देशों के पर्यटकों को खींचकर ला रहा है। पर्यटकों को चंबल का भ्रमण कराने वाले नेचुरलिस्ट गजेंद्र सिंह डागर ने बताया कि विदेशी पर्यटक चंबल की वादियों में उड़ान भरती देसी, विदेशी चिड़ियों के गूंजते कलरव, जलक्रीड़ा करते घड़ियाल, मगरमच्छ को देखकर आश्चर्य में पड़े बिना नहीं रहते हैं। चंबल सफारी जरार के निदेशक आरपी सिंह ने बताया कि चंबल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटक आएंगे तो स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

चंबल में बढ़ रही दुर्लभ प्रजातियों की संख्या पर एक नजर-
प्रजातियां 2023 2024 2025

इंडियन स्किमर 740 843 1,000
घड़ियाल 2,108 2,456 2,938

मगरमच्छ 878 928 1,512
डॉल्फिन 96 111 155