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आगरा, संवाददाता : सावन माह के कृष्ण पक्ष की शुरुआत के साथ अब श्रद्धालुओं की आस्था 3 अगस्त को पड़ने वाले सावन के पहले सोमवार पर केंद्रित हो गई है। ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश प्रचेता के अनुसार इस दिन पंचमी तिथि और सुकर्मा योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और सोमवार व्रत का विशेष महत्व रहेगा। 

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शिव आराधना करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शहद और फल अर्पित करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। 

आगरा के प्रमुख शिवालयों कैलाश महादेव, पृथ्वीनाथ महादेव, प्राचीन राजेश्वर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, बल्केश्वर महादेव और रावली महादेव में सावन के पहले सोमवार के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था, बेरिकेडिंग और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। सोमवार को तड़के से ही जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

प्रथम दिन द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर निर्माण स्थल पर रुद्राभिषेक, कलश स्थापना

सावन मास के प्रथम दिन शुक्रवार को कैलाश मंदिर स्थित निर्माणाधीन श्रीद्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच रुद्राभिषेक, भूमि पूजन और कलश स्थापना की गई। महंत गौरव गिरी जी महाराज के सानिध्य में नितेश शर्मा एवं शिवभक्तों ने भगवान शिव का पूजन कर मंदिर निर्माण की मंगलकामना की।

अनुष्ठान के दौरान भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर बिल्वपत्र, पुष्प एवं पूजन सामग्री निर्माण स्थल पर अर्पित की गई। वहीं सनातन परंपरा के अनुसार ताम्र पात्र में पवित्र रज, रुद्राक्ष, सुपारी और अन्य शुभ सामग्री स्थापित कर कलश को वैदिक रीति से भूमि में स्थापित किया गया।

महंत गौरव गिरी जी महाराज ने बताया कि निर्माणाधीन श्रीद्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र बनेगा, जहां एक ही परिसर में भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।