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पुणे, संवाददाता : राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के एक आपराधिक मामले में गवाही देते हुए विनायक दामोदर सावरकर के पड़पोते सत्याकी सावरकर ने दावा किया कि महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे की गोली लगने के बाद करीब 20 मिनट तक घटनास्थल से नहीं ले जाया गया।

उन्होंने इसे उस समय की सरकार की गांधी के प्रति उदासीनता बताया। हालांकि, यह दावा अदालत में दिए गए सत्याकी के बयान का हिस्सा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं है।

सोमवार को पुणे की एमपी/एमएलए अदालत के विशेष जज अमोल शिंदे के सामने राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद पवार ने सत्याकी से जिरह की।

जिरह के दौरान सत्याकी ने कहा कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे

जिरह के दौरान सत्याकी ने कहा कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे, तभी उनके चचेरे दादा नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी।

आवाज के नमूने लेने की मांग इस बीच, सत्याकी के वकील संग्राम कोल्हटकर ने अदालत में एक आवेदन दाखिल कर 22 अगस्त को राहुल गांधी के पुणे दौरे के दौरान उनके आवाज के नमूने लेने की मांग की।

राहुल गांधी उस दिन ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत छात्रों से बातचीत करने पुणे पहुंचने वाले हैं। गांधी की ओर से पेश वकील ने आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा और अदालत को बताया कि वह एक सितंबर को अपना पक्ष रखेंगे।

सावरकर को लेकर बयान से शुरू हुआ मामलायह आपराधिक मानहानि मामला सत्याकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ दायर किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने सावरकर के बारे में गलत दावा किया था।

उनका आरोप है कि राहुल ने कहा था कि सावरकर ने अपनी एक किताब में एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट करने और इस घटना से खुशी मिलने का जिक्र किया है।

सत्याकी का कहना है कि सावरकर की किसी भी रचना में ऐसी घटना का उल्लेख नहीं मिलता। इसी आरोप को लेकर उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दाखिल की है। मामले की सुनवाई के दौरान अब गांधी के बयान और सावरकर परिवार की ओर से पेश किए जा रहे दावों को लेकर अदालत में जिरह जारी है।