कानपुर, संवाददाता :Kanpur news :केस्को में बिजली उपकरण के 1.52 करोड रुपये के स्क्रैप घोटाले के आरोपी अवर अभियंता (जेई) मुन्ना यादव को मंगलवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद विभाग ने उसे निलंबित भी कर दिया। जेल जाने से पहले उसने पुलिस को बताया कि घोटाले में एक एक्सईएन की भी भूमिका है। उसने इससे जुड़े कुछ साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। ऐसे में अब एक्सईएन की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। ग्वालटोली थाने में जेई स्टोर रमेश चंद्र ने घोटाले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि केस्को ने स्टोर रूम में पड़े स्क्रैप की 17 जून को नीलामी कराई थी। इसमें गुजरात के भड़ूच की कंपनी एमए ट्रेडर्स को 20.04 लाख रुपये में स्क्रैप वाले 35.161 टन लोहे के खंभे खरीदने का ठेका मिला था। कंपनी के ट्रक तीन राउंड में माल ले जा चुके थे। चौथे और आखिरी चक्कर में 10 टन स्क्रैप उठाना था जबकि स्टोर वालों की मिलीभगत से 10 की जगह 22 टन स्क्रैप लादकर निकाल दिया गया। गड़बड़ी की आशंका पर जेई रमेश यादव ने पीछा किया तो उन्हें शास्त्रीनगर में ट्रक मिल गया। चालक ने धर्मकांटे की पर्ची दिखाई तो दोगुने से ज्यादा माल लदा देखकर वह चौंक गए। मामला उजागर होने पर केस्को प्रबंधन ने भी कार्रवाई की थी। स्टोर के तत्कालीन एक्सईएन श्रीकांत रंगीला से स्टोर का चार्ज वापस लेकर उन्हें नेटवर्क एवं डाटा एनालिसिस डिवीजन में भेज दिया गया था स्टोर के तत्कालीन एक्सईएन श्रीकांत रंगीला से स्टोर का चार्ज वापस लेकर उन्हें नेटवर्क एवं डाटा एनालिसिस डिवीजन में भेज दिया गया था। वहीं, जेई मुन्ना यादव को भी स्टोर से हटाकर बाबूपुरवा सबस्टेशन के टेक्निकल वर्टिकल में स्थानांतरित किया गया था। विभागीय स्तर पर मामले की जांच अधीक्षण अभियंता (प्रोजेक्ट) अनुराग कटियार को सौंपी गई थी। जांच के बाद मुन्ना को जेल भेज दिया गया है। मुन्ना यादव के कबूलनामे के बाद एक्सईएन और स्टोर में तैनात रहे अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि स्क्रैप घोटाला जेई मुन्ना यादव ने एक्सईएन समेत कुछ अन्य लोगों से मिलीभगत के बारे में जानकारी दी है। सभी से पूछताछ की जाएगी। अच्छे उपकरण को कबाड़ बताकर बेचने-खरीदने का चल रहा खेलस्क्रैप घोटाले की जांच की आंच कई लोगों को अपनी चपेट में ले सकती है। पुलिस के अनुसार, जेल जाने से पहले जेई मुन्ना यादव ने कई लोगों की भूमिका बताई है। आरोप है कि स्टोर में रखे अच्छे उपकरण भी स्क्रैप की श्रेणी में डालकर निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। अब विभागीय जांच में देखा जा रहा है कि किन परिस्थितियों में उपकरणों को स्क्रैप घोषित किया गया और उनके मूल्यांकन की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई। जांच अधिकारियों की नजर स्टोर के स्टॉक रजिस्टर, उपकरणों की प्राप्ति और निर्गमन के रिकॉर्ड, मूल्यांकन रिपोर्ट और स्क्रैप निस्तारण से जुड़े दस्तावेजों पर है। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर विभागीय कार्रवाई के साथ आर्थिक नुकसान की भरपाई की कार्रवाई भी हो सकती है। अब पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। Post navigation पंजाबी लोकगीत पर बना सुपरहिट गाना, शादी एंथम को सुनिधि चौहान ने दी आवाज जापान के साथ साझेदारी UP को10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में अहम-योगी