नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने देश में लगातार बढ़ती कचरे की समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ठोस कचरा प्रबंधन केवल नगर निकायों या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति, परिवार, संस्था और प्रतिष्ठान कचरा पैदा करता है। इसलिए उसके उचित प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उसी की है। समाज में बनी यह धारणा खत्म होनी चाहिए कि कचरा पैदा करना नागरिक का अधिकार है, लेकिन उसके प्रभाव को रोकना और प्रबंधन में सहयोग करना उसकी जिम्मेदारी नहीं है। कोर्ट का संदेश साफ है कि कचरा पैदा करने वाला हर व्यक्ति समाधान का भी हिस्सा बने। जस्टिस एसवीएन भट्टी और एनवी अंजारिया की पीठ ने 18 अगस्त को ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि केवल समितियां और प्रवर्तन एजेंसियां गठित कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए नागरिकों के व्यवहार में बदलाव जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट निगरानी समिति राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से जिला कलेक्टरों को अपने-अपने क्षेत्रों में सभी बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान करने का निर्देश देगी बड़े कचरा उत्पादकों पर सख्ती की बात करते हुए आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट निगरानी समिति राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से जिला कलेक्टरों को अपने-अपने क्षेत्रों में सभी बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान करने का निर्देश देगी। यह प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। बड़े कचरा उत्पादकों को कचरे को अलग-अलग करने, सुरक्षित तरीके से रखने और निर्धारित एजेंसी को सौंपने की जिम्मेदारी के बारे में लिखित रूप से जानकारी दी जाएगी। नियमों का पालन नहीं करने वाले बड़े कचरा उत्पादकों के खिलाफ पानी और बिजली की आपूर्ति अस्थायी रूप से काटने की कार्रवाई की जा सकती है। आपूर्ति तभी बहाल होगी जब संबंधित कचरा उत्पादक अनुपालन प्रमाणपत्र पेश करेगा। कोर्ट ने स्कूल के विद्यार्थियों को ठोस कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया है। स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को विद्यार्थियों के लिए ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी सैद्धांतिक और व्यावहारिक शिक्षा को पढ़ाई में शामिल करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रशिक्षित विद्यार्थी अपने परिवारों को कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेंगे। शिक्षित बच्चे अपने माता-पिता और रिश्तेदारों को कचरा प्रबंधन के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम हो सकते हैं। नदियों में कचरा जाने पर भी कोर्ट की पैनी नजर है नदियों में कचरा जाने पर भी कोर्ट की पैनी नजर है। शीर्ष अदालत ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट निगरानी समिति को नगरपालिका के ठोस कचरे और सामग्री के कारण नदियों में होने वाले जल प्रदूषण पर विशेष ध्यान देने को कहा है। समिति को इससे संबंधित आंकड़े अदालत के समक्ष रखने होंगे। कोर्ट ने डिजिटल निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया है। कचरा जमा होने की जियो-टैग तस्वीरों और मासिक अनुपालन रिपोर्ट के जरिये निगरानी की व्यवस्था पर काम किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दीर्घकालिक लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें सरकारी निगरानी पर निर्भरता कम हो और नागरिकों तथा संस्थानों में स्व-नियमन की भावना विकसित हो। संविधान का अनुच्छेद 51ए(जी) नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा का दायित्व देता है, जबकि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार अनुच्छेद 21 से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि केवल कानून बनाने से नागरिक व्यवहार नहीं बदलेगा। कानून नियम और उनके उल्लंघन के परिणाम तय करके सहयोग सुनिश्चित कर सकता है कानून नियम और उनके उल्लंघन के परिणाम तय करके सहयोग सुनिश्चित कर सकता है, लेकिन कानून अपने आप नागरिक व्यवहार पैदा नहीं कर सकता। अनुपालन तभी सुनिश्चित होगा, जब प्रत्येक व्यक्ति और संस्थागत कचरा उत्पादक इस दायित्व को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाएगा। सुप्रीम कोर्ट निगरानी समिति ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ रेलवे, रक्षा मंत्रालय और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों में अनुपालन की निगरानी का निर्देश दिया है। रेलवे, रक्षा मंत्रालय तथा अन्य मंत्रालयों द्वारा किए जाने वाले क्षेत्रवार अनुपालन की निगरानी सुप्रीम कोर्ट निगरानी समिति करेगी। कोर्ट ने मामले को 17 नवंबर को फिर सुनवाई पर लगाने का निर्देश दिया है। इस मामले में नवंबर में अल्पकालिक, जनवरी में मध्यम अवधि और 10 अप्रैल, 2027 को वार्षिक रिपोर्ट पेश की जाएगी। Post navigation सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में सोने की खदान ढहने से, 100 से ज्यादा लोगों की मौत बंगाल सरकार ने SC से कहा, अभिषेक बनर्जी के PAसे हिरासत में पूछताछ जरूरी