धमतरी, संवाददाता : मतांतरण को लेकर चर्चित छतीसगढ़ के धमतरी जिले में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है। अब जिला मुख्यालय के सभी आठ चर्चों में बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर लिखा है कि चर्च में प्रवेश केवल ईसाइयों को मिलेगा। प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू होने के बाद जिले में बीते डेढ़ माह के दौरान करीब 1500 आवेदन मिले हैं। इनमें अधिकांश आवेदन प्रार्थना सभा में शामिल होने की अनुमति से संबंधित हैं। इसके बाद हिंदू संगठनों, सर्व आदिवासी समाज और क्रिश्चियन फोरम की कलेक्ट्रेट में बैठक हुई। इसमें प्रार्थना सभा सहित अन्य विषयों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद ही चर्चों में ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं। जिले में कुल 30 पंजीकृत चर्च हैं। शहर के 116 साल पुराने सुंदरगंज मेनोनाइट चर्च सहित अन्य चर्चों में भी बोर्ड लगाए गए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, प्रार्थना सभा की अनुमति के लिए प्राप्त अधिकांश आवेदन अनुसूचित जाति और साहू समाज के लोगों के हैं। आवेदकों को प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए अनुमति की प्रक्रिया से गुजरना होगा प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए आवेदन फार्म में आठ बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। आवेदकों को प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए अनुमति की प्रक्रिया से गुजरना होगा। जिले में मतांतरण और प्रार्थना सभा को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती है। छह सितंबर को प्रार्थना सभा में 40 लोगों की मौजूदगी व कई अन्य मौकों पर मतांतरित व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद सामने आ चुका है। प्रार्थना सभा में प्रवेश को लेकर लगाए जा रहे इन बोर्डों के संबंध में ईसाई समाज का कहना है कि इसका उद्देश्य चर्च परिसर में अनुशासन बनाए रखना है। वहीं, प्रशासन की बैठक के बाद प्रार्थना सभा और आवेदन प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। धमतरी जिला क्रिश्चियन फोरम के जनरल सेक्रेटरी डॉ. डायमंड फिलस ने बताया कि चर्च में किसी के आने पर रोक नहीं है। सुरक्षात्मक दृष्टि से आपराधिक तत्वों के प्रवेश पर रोक के लिए नोटिस लगाया गया है। Post navigation नीला विखे पाटिल स्वीडन में सांसद बनीं, पिता महाराष्ट्र में हैं प्रख्यात शिक्षाविद टीम इंडिया के जापान रवाना होने में आई रुकावट, किट की परेशानी ने खड़ी की मुसीबत