लखनऊ, डॉ.जितेंद्र बाजपेयी : BSP in Rajya Sabha: यूपी: अगले महीने से राज्यसभा में शून्य हो जाएगी बसपा, राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी खतरे में; जानिए पूरी कहानी बहुजन समाज पार्टी की अगले माह लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी हिस्सेदारी शून्य हो जाएगी। पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल अगले माह समाप्त हो रहा है। बसपा के पास इतने विधायक नहीं हैं, जो उसके किसी उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सकें। इन हालात में बसपा राज्यसभा चुनाव में अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारने का फैसला भी ले सकती है। बता दें कि बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में भी बसपा की उपस्थिति समाप्त हो चुकी है। राज्यसभा में उनके किसी प्रत्याशी को जाने के लिए कम से कम 37 वोटों की दरकार होगी। इतनी बड़ी संख्या में वोट जुटा पाना फिलहाल बसपा के लिए असंभव है। इन हालात में पार्टी का लोकसभा, राज्यसभा के साथ यूपी की विधानसभा और विधान परिषद में कोई सदस्य नहीं बचेगा। बीते करीब डेढ़ दशक से बसपा का सियासी सफर संकट भरा रहा है दरअसल, बीते करीब डेढ़ दशक से बसपा का सियासी सफर संकट भरा रहा है। वर्ष 2019 में बसपा के 10 प्रत्याशी लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे हालांकि तब बसपा ने सपा के साथ गठबंधन किया था। इसके बाद वर्ष 2022 के चुनाव में बसपा के उमाशंकर सिंह बलिया की रसड़ा सीट से जीत हासिल कर पाए थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला था। चुनाव दर चुनाव बसपा का वोट प्रतिशत भी घटने से पार्टी को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है। राज्यसभा चुनाव के बाद बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा फिर खतरे में पड़ जाएगा। बसपा की स्थापना वर्ष 1984 में कांशीराम ने की थी। पार्टी को वर्ष 1997 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था। हालांकि चुनाव आयोग ने पिछले साल बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखा था। अब अगले वर्ष होने वाले यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बसपा के राष्ट्रीय पार्टी होने का भविष्य तय कर सकते हैं। गठबंधन नहीं होने से मुश्किल दरअसल बसपा ने वर्ष 2019 के बाद किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं किया है। इसकी वजह से उसका राज्यसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होने की कगार पर है। गठबंधन होने पर उसे सहयोगी दल के वोट मिल सकते थे, जिसके लिए अब देर हो चुकी है। Post navigation 20 दिन में छठवीं बार युवक को सांप ने डसा, अंकुश अस्पताल में भर्ती डुसू चुनाव में प्रयागराज की लक्ष्वी बनीं सचिव, गांव में खुशी की लहर