अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट, निकली मां गंगा की उत्सव डोली

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नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : सनातन धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक चार धाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है और अक्षय तृतीया के दिन, कल रविवार (19 अप्रैल) को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे।

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के मंदिरों में सजावट का काम भी शुरू हो चुका है, लेकिन इसी के साथ मां गंगा की उत्सव डोली आज शनिवार को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव से गंगोत्री धाम के लिए विधिवत पूजा-अर्चना के साथ रवाना हो गई।

मां गंगा की उत्सव डोली को शनिवार को विधिवत पूजा के साथ रवाना किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा, और उल्लास का संगम देखने को मिला। मां गंगा की उत्सव डोली के रवाना होने के साथ भक्तों के बीच उत्साह देखा गया। रविवार को निर्धारित शुभ मुहूर्त में गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलते ही देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के दर्शन शुरू हो जाएंगे।

मां गंगा की उत्सव डोली की विशेष पूजा-अर्चना

मुखवा गांव में डोली प्रस्थान से पहले मां की उत्सव डोली की विशेष पूजा-अर्चना की गई और पूरे गांव को भव्य तरीके से सजाया गया। स्थानीय लोगों ने भी मां गंगा की डोली को ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से मां के साथ विदा किया। पूरे मंदिर परिसर में श्रद्धालु की “जय मां गंगे” के जयकारों की गूंज सुनने को मिली। डोली यात्रा में भक्तों और अधिकारियों की भारी भीड़ देखने को मिली। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और साधु-संत, तीर्थ पुरोहित, स्थानीय जनप्रतिनिधि, और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। सभी मिलकर मां गंगा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।

रविवार को अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट

वहीं दूसरी तरफ अक्षय तृतीया के मौके पर मां गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे, जिसको लेकर मंदिर समिति और प्रशासन की तरफ से पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यातायात प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सफाई व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

शीतकाल में अधिक बर्फबारी की वजह से गंगोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मां गंगा की विग्रह डोली को मुखवा गांव में बने मंदिर में स्थापित किया जाता है, और वहां पूरे विधान के साथ मां गंगा की पूजा की जाती है।

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