श्रद्धा बनाम सत्ता : बाबा फूलदास की समाधि के लिए साधु-संतों का मौन संघर्ष

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अमेठी, संवाददाता : बुधवार बाबा फूलदास जी की समाधि स्थल को कथित अवैध कब्जे से मुक्त कराए जाने की मांग को लेकर साधु-संतों द्वारा प्रस्तावित अनिश्चितकालीन अनशन को पुलिस प्रशासन द्वारा बलपूर्वक रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय विश्व हिन्दू परिषद के तत्वावधान में बाबागंगा दास कुटी, सिन्दुरखा, जगदीशपुर–अमेठी स्थित समाधि स्थल पर 21 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन अनशन की पूर्व घोषणा की गई थी, जिसकी विधिवत सूचना 12 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा चुकी थी।

परिषद और साधु-संतों का आरोप है कि पूर्व सूचना के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस पहल नहीं की। 21 जनवरी को जब साधु-संत शांतिपूर्ण ढंग से अनशन हेतु समाधि स्थल की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तभी शुकुल बाजार थाना क्षेत्र में पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें मार्ग में ही रोक दिया और चारों ओर से अवरोध खड़े कर दिए। इस दौरान राष्ट्रीय विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत गुरु बक्स दास जी और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई।

परिषद ने इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन बताया

साधु-संतों का कहना है कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें समाधि स्थल तक जाने से रोका तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। संतजन लगातार हाथ जोड़कर प्रशासन से निवेदन करते रहे, यहां तक कि भावुक होकर पुलिसकर्मियों के समक्ष पैर पकड़कर भी अनुरोध किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। परिषद ने इस कार्रवाई को संविधान प्रदत्त शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन बताया है।

घंटों के प्रयास के बाद जब अनशन को जबरन रोक दिया गया, तब पुनः अपनी मांगों से संबंधित एक प्रार्थना पत्र उप जिलाधिकारी को पुलिस के माध्यम से सौंपा गया। पुलिस अधिकारियों ने उक्त पत्र को संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया, हालांकि अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

राष्ट्रीय विश्व हिन्दू परिषद, साधु-संतों एवं स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार और प्रशासन इस गंभीर विषय पर निर्णायक कार्रवाई नहीं करते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि समाधि स्थल से जुड़े इस मामले में कई बार प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन लगातार उपेक्षा के चलते उन्हें शांतिपूर्ण अनशन का मार्ग अपनाना पड़ा।

परिषद ने इस पूरे घटनाक्रम को साधु-संतों, संगठन और जनमानस के सम्मान, धार्मिक आस्था तथा सनातन परंपराओं पर सीधा आघात करार दिया है। साथ ही प्रशासन से निष्पक्ष जांच, शीघ्र न्याय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की मांग करते हुए अपील की है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस विषय का शांतिपूर्ण एवं न्यायसंगत समाधान निकालकर समाज में सौहार्द, विश्वास और धार्मिक सद्भाव बनाए रखा जाए।

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