हमीरपुर, संवाददाता : दूल्हे के पिता जागेंद्र द्विवेदी ने बताया कि आजकल शादियों में दिखावा बढ़ता जा रहा है, लेकिन उन्होंने पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को प्राथमिकता दी। किसान परिवार होने के कारण बैल और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए बेटे की बरात भी पारंपरिक तरीके से निकालने का निर्णय लिया गया।
दूल्हे के पिता जागेंद्र द्विवेदी ने बताया कि आजकल शादियों में दिखावा बढ़ता जा रहा है, लेकिन उन्होंने पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को प्राथमिकता दी। किसान परिवार होने के कारण बैल और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए बेटे की बरात भी पारंपरिक तरीके से निकालने का निर्णय लिया गया।
बैलगाड़ी से नहीं हुई दुल्हन की विदाई
बताया गया कि विवाह 25 फरवरी को दिन में संपन्न हुआ। पूरी बरात बैलगाड़ियों से गुढ़ा गांव से फार्म हाउस तक पहुंची। बृहस्पतिवार को दुल्हन की विदाई बैलगाड़ी से ही नहीं हो सकी। बराती अन्नू दीक्षित ने बताया कि दुल्हन की विदाई कार से कराई गई। विवाह के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश
दूल्हे के पिता जागेंद्र द्विवेदी ने बताया कि आजकल शादियों में दिखावा बढ़ता जा रहा है, लेकिन उन्होंने पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को प्राथमिकता दी। किसान परिवार होने के कारण बैल और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए बेटे की बरात भी पारंपरिक तरीके से निकालने का निर्णय लिया गया। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ना है।
विवाह केवल रस्म नहीं संस्कार है
दुल्हन के पिता विवेक पाठक, निवासी जलालपुर थाना के भेड़ी डांडा गांव ने बताया कि विवाह केवल एक रस्म नहीं बल्कि संस्कार है। पारंपरिक रीति से मेहमानों का स्वागत किया गया और सभी को बैठाकर भोजन कराया गया। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है।
दुल्हन बीए पास, दूल्हा चलाता है दुकान
दुल्हन मोहानी (20) ने बीए फाइनल की पढ़ाई पूरी की है। वहीं दूल्हा मोहित द्विवेदी, निवासी गुढ़ा गांव, ऑटोमोबाइल से संबंधित सामान की दुकान संचालित करने के साथ खेती-किसानी में भी परिवार का सहयोग करता है। पारंपरिक अंदाज में संपन्न यह विवाह समारोह क्षेत्र में ग्रामीण संस्कृति की मिसाल बन गया है।
