India-Nepal

 नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने रविवार को स्पष्ट कहा कि काठमांडू भारत के साथ सीमा विवाद को तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के बिना, मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के जरिये सुलझाना चाहता है।

शिशिर खनल ने जोर देकर कहा कि जब दोनों पक्ष खुले दिल, तर्कसंगत सोच और आपसी सम्मान के साथ बैठते हैं तो कोई समस्या इतनी बड़ी या जटिल नहीं होती।

पुराने बोझ के बंधक नहीं बनेंगे भारत-नेपाल के रिश्ते

नेपाल दूतावास की तरफ से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के साथ संबंधों पर खनल ने कहा कि नेपाल नई दिल्ली को 21वीं सदी की भू-राजनीति के अतिसंवनेदनशील चश्मे से नहीं देखना चाहता। दोनों देशों के बीच एक स्पष्ट व पारदर्शी एजेंडा होना चाहिए।

प्रधानमंत्री बाले शाह की नई सरकार को पूरी तरह नई राजनीतिक वास्तविकता बताते हुए खनल ने कहा कि यह सरकार लेकर भारत-नेपाल संबंधों को पुराने बोझ का बंधक नहीं बनाना चाहती।

खनल की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई, जब नेपाल के प्रधानमंत्री शाह ने हाल ही में सीमा विवाद पर चीन और ब्रिटेन की भूमिका का जिक्र किया था, जिसे भारत ने साफ तौर पर खारिज कर दिया था।

नेपाल का यू-टर्न

खनल ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन से संबंधित टिप्पणी केवल ऐतिहासिक दस्तावेज और ब्रिटिश लाइब्रेरी-म्यूजियम से जानकारी हासिल करने तक सीमित थी, न कि मध्यस्थता की मांग।

उन्होंने कहा-आइए ऐसी साझेदारी बनाएं जो अतीत की चिंताओं से बंधी न हो, बल्कि साझा भविष्य की ऊंची उम्मीदों और संभावनाओं से प्रेरित हो।

खनल ने भारत को तेजी से उभरती वैश्विक आर्थिक और तकनीकी महाशक्ति बताते हुए कहा कि नेपाल इसके साथ अपनी आकांक्षाओं की ऊर्जा जोड़ना चाहता है।

खनल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई विस्तृत वार्ता का जिक्र करते हुए कहा कि व्यापार, आधुनिक प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग तेजी से प्रगाढ़ किया जाएगा।

‘सीमा बाधा नहीं पुल का काम करती है’

खनल ने सीमा मुद्दे पर कहा कि सच्ची निर्भरता में सीमाएं बाधा नहीं, बल्कि पुल का काम करती हैं। हालांकि, खनल ने कलापानी-लिपुलेख-लिम्पियाधुरा क्षेत्र पर नेपाल का दावा फिर से दोहराया और कहा कि काठमांडू इस मुद्दे को द्विपक्षीय तंत्र से ही हल करना चाहता है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा समझौते पर चिंता जताई

खनल ने भारत-चीन के बीच लिपुलेख मार्ग पर कैलाश मानसरोवर यात्रा संबंधी समझौते पर नेपाल की चिंता भी व्यक्त की और कहा कि नेपाल की सहमति के बिना ऐसे फैसले नहीं हो सकते।

खनल ने 2026 को दोनों देशों के संबंधों को बदलने का सबसे अनुकूल समय बताया। खनल का कहना था कि नई सरकार का मुख्य लक्ष्य कागजी वादों और वास्तविकता के बीच की खाई को पाटना तथा ठोस बदलाव वाले परिणाम देना है।