बरेली, संवाददाता : बरेली जिले में दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मेहतन पर पानी फेर दिया है। कटाई के मुहाने पर खड़ी धान की फसल खेत में बिछ गई। खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने का बढ़ गया है। गन्ना, दलहनी और तिलहनी फसलों का भी नुकसान हुआ है। बरेली में शुक्रवार को शुरू हुई बारिश शनिवार को दिनभर जारी रही। दो दिन की लगातार बारिश और तेज हवा ने खेतों में खड़ी फसलों को खासा नुकसान पहुंचाया है। कटाई के मुहाने पर पहुंच चुकी धान की फसल खेतों में बिछ गई। गन्ने की फसल भी तेज हवा और बारिश से गिर गई है। खेतों में पानी भरने से उड़द, मूंग, तिल समेत अन्य दलहनी और तिलहनी फसलों पर भी संकट गहरा गया है। सब्जियों में सड़न और फंगस का खतरा बढ़ गया है। इससे किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल हो सकता है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 5 लाख 44 हजार से अधिक किसान हैं। इस वर्ष डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक में धान, 1.25 लाख हेक्टेयर में गन्ना का लक्ष्य है। जिले में खरीफ सीजन में सबसे अधिक रकबा धान का है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार धान की तीन श्रेणियों के लिए 1,58,592 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित था, जबकि 1,58,627.44 हेक्टेयर में धान की फसल बोई गई। इसमें 53,010.60 हेक्टेयर सुगंधित, 58,005.80 हेक्टेयर सामान्य व 47,611.04 हेक्टेयर अन्य धान शामिल है। वहीं गन्ने का रकबा करीब 1.25 लाख हेक्टेयर है। दोनों प्रमुख फसलों पर बारिश और तेज हवा का असर किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। दलहनी फसलों का भी बड़ा रकबा, जलभराव से बढ़ी चिंता बारिश का असर केवल धान और गन्ने तक सीमित नहीं है। जिले में उड़द 15,063.51, मूंग 1,398.14, अरहर 360.04 और तिल 6,365.64 हेक्टेयर में बोया गया है। लगातार नमी और खेतों में पानी भरने से इन फसलों में सड़न और फंगस लगने की आशंका है। इसके अलावा बाजरा 7,761, ज्वार 4,124, मक्का 946, श्रीअन्न 27.01, मूंगफली 25 और सोयाबीन नौ हेक्टेयर में बोई गई है। सब्जी उत्पादकों को भी जलभराव के कारण नुकसान की चिंता सता रही है। फसलें बिछने के बाद विभाग को आई सर्वे की याददो दिन की बारिश के बाद खेतों में फसलों के गिरने और नुकसान की सूचनाएं मिलने पर कृषि विभाग ने सभी विकासखंडों में तैनात अधिकारियों को नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसानों को फसल बीमा का लाभ लेने के लिए जागरूक करने को कहा गया है। विभाग के मुताबिक सोमवार से विशेष टीमें गांव-गांव जाकर फसलों की स्थिति का जमीनी आकलन करेंगी। सर्वे के बाद नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। किसानों से खेतों से पानी निकालने का आग्रह कृषि विभाग ने किसानों से खेतों में लंबे समय तक पानी जमा न रहने देने की अपील की है। विभाग का कहना है कि जलनिकासी की व्यवस्था करने से फसल को होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया है, उन्हें नुकसान की सूचना संबंधित टोल-फ्री नंबर पर देने की सलाह दी गई है। खरीफ फसलों का रकबा एक नजर में – धान: 1,58,627.44 हेक्टेयर– गन्ना: करीब 1.25 लाख हेक्टेयर– उड़द: 15,063.51 हेक्टेयर– बाजरा: 7,761 हेक्टेयर– तिल: 6,365.64 हेक्टेयर– ज्वार: 4,124 हेक्टेयर– मूंग: 1,398.14 हेक्टेयर– मक्का: 946 हेक्टेयर– अरहर: 360.04 हेक्टेयर– श्रीअन्न: 27.01 हेक्टेयर– मूंगफली: 25 हेक्टेयर– सोयाबीन: 9 हेक्टेयर कृषि उपनिदेशक ओपी मिश्र ने बताया कि भारी बारिश के चलते धान, गन्ना समेत अन्य फसलों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। किसानों से आग्रह है कि 48 घंटे के भीतर फ़सल बीमा योजना का लाभ ले। किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर स्थानीय ब्लॉक या फिर कृषि अधिकारी और उपनिदेशक कर्यालय में संपर्क कर सकते हैं। फसल नुकसान को लेकर सर्वे कराने के लिए भी टीमों को आदेशित कर दिया गया है। Post navigation UP : यूपी में बीते 48 घंटों से लगातार बारिश, जिलों में हादसे Khel Now and Cricketaaa Announce India-UAE Strategic Partnership to Expand Global Cricket Reach Ahead of 2027 ODI World Cup