Bengal : चुनाव आयोग की सख्ती के चलते 50 साल में तीसरी बार हुआ ‘शांतिपूर्ण और निष्पक्ष’ मतदान

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कोलकाता, ब्यूरो : बंगाल ने 2026 के विधानसभा चुनाव में एक ऐतिहासिक मिसाल पेश की है। लगभग पांच दशकों में यह तीसरी बार है जब राज्य ने पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव देखा। इससे पहले वर्ष 1971 और 2011 के विधानसभा चुनाव में ऐसी स्थिति देखने को मिली थी।

इस बार चुनाव के दौरान न केवल मतदान के दिन, बल्कि पूरे प्रचार अभियान में भी किसी प्रकार की हिंसा या जानमाल के नुकसान की घटना सामने नहीं आई। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी और रणनीतिक फैसलों को इस सफलता का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

राज्य में रिकॉर्ड तोड़ मतदान

दो चरणों में हुए मतदान में वोटिंग प्रतिशत 92.93 फीसद रहा, जो यह दर्शाता है कि मतदाता बिना किसी भय के मतदान केंद्रों तक पहुंचे। अगर पिछले चुनावों से तुलना करें, तो 2021 के विधानसभा चुनाव में 24 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2016 में सात लोगों की जान गई थी।

इसके विपरीत, 2026 में यह संख्या शून्य रही। इतना ही नहीं, इस बार बमबाजी जैसी घटनाएं भी पूरी तरह से नदारद रहीं, जबकि 2021 में 60 से ज्यादा बमबाजी की घटनाएं दर्ज की गई थीं।

चुनाव आयोग के अधिकारियों की अहम भूमिका
इस बदलाव के पीछे चुनाव आयोग के अधिकारियों की अहम भूमिका रही। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल, विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एनके मिश्रा की रणनीति और प्रशासनिक नियंत्रण को निर्णायक माना जा रहा है। इन अधिकारियों ने चुनाव की घोषणा से पहले ही पुलिस और प्रशासन में बड़े स्तर पर बदलाव किए और पूरी व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार राजनीतिक दलों के खिलाफ सीधे कार्रवाई करने के बजाय प्रशासनिक ढांचे को मजबूत और निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया गया। इसी वजह से चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनी रही।

अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकता है यह चुनाव

इतिहास के नजरिए से देखें तो बंगाल में चुनावी हिंसा और धांधली लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रहा है। 1972 के चुनाव को राज्य के इतिहास का सबसे विवादित चुनाव माना जाता है, जबकि 1977 में सत्ता परिवर्तन हुआ था। हालांकि, 2026 का चुनाव इन सभी विवादों से अलग एक नई दिशा दिखाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों और विभिन्न दलों के नेताओं ने भी इस चुनाव को शांतिपूर्ण मानते हुए चुनाव आयोग, प्रशासन, केंद्रीय बलों और राजनीतिक दलों सभी को इसका श्रेय दिया है। यह चुनाव आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक माडल बन सकता है।

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