नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के संबंध में मुलाकात की। सीएम बनर्जी ने कई बार आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया बिना सही प्रक्रिया अपनाए जल्दबाजी में की जा रही है।
सीएम ममता के साथ टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और SIR प्रक्रिया से कथित तौर पर प्रभावित हुए 13 परिवारों के सदस्य भी थे। इस प्रतिनिधिमंडल में पांच ऐसे लोग शामिल थे जिनके नाम कथित तौर पर मृत घोषित किए जाने के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे, पांच ऐसे लोगों के परिवार के सदस्य थे जिनकी SIR नोटिस मिलने के बाद ‘मौत’ हो गई थी, और तीन बूथ लेवल अधिकारियों के परिवार थे जिनकी कथित तौर पर दबाव में मौत हो गई थी।
क्या बोलीं ममता ?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। मैं बहुत लंबे समय से दिल्ली की राजनीति में शामिल हूं। मैं 4 बार मंत्री और 7 बार सांसद रही हूं। मैंने ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त कभी नहीं देखा। मैंने उनसे कहा कि मैं आपकी कुर्सी की इज्जत करती हूं क्योंकि कोई भी कुर्सी किसी के लिए स्थायी नहीं होती। एक दिन आपको जाना ही होगा। बंगाल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है। चुनाव लोकतंत्र में एक त्योहार होते हैं, लेकिन आपने 98 लाख लोगों के नाम हटा दिए और उन्हें अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया।”
ममता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
ममता बनर्जी ने राज्य में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डोला सेन और डेरेक ओ’ब्रायन ने SIR के संबंध में याचिकाएं दायर की थीं, जो फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। इन याचिकाओं पर 4 फरवरी को सुनवाई होने की संभावना है और बनर्जी की याचिका पर भी उनके साथ ही सुनवाई हो सकती है।
