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मेरठ, संवाददाता : Meerut News: शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में सुबह छह बजे फोर्स तैनात कर दी गई थी। 7:15 बजे ध्वस्तीकरण का काम शुरू हो गया। आवास विकास के अधिकारियों ने बताया कि बिना नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण कराया था, जो गिराया गया। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होनी है। 

शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में सील किए गए 44 भवनों में से छह को बुधवार को भारी फोर्स की मौजूदगी में बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। ये सभी आवासीय संपत्तियां थीं, जिनका नक्शा स्वीकृत नहीं था और बिना नक्शा स्वीकृत कराए अवैध निर्माण किए गए थे। ध्वस्त की गई छह संपत्तियों में एक बैंक्वेट हॉल और पांच कॉम्प्लेक्स शामिल थे। इन कॉम्प्लेक्स में करीब 35 दुकानें थीं।

कार्रवाई के दौरान सुबह छह बजे ही शास्त्रीनगर से जुड़े रास्तों को बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया गया। इससे स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई। बिजली आपूर्ति भी काट दी गई थी। सुबह सवा सात बजे से ध्वस्तीकरण शुरू किया गया।

सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई से पहले 14 जुलाई के ध्वस्तीकरण आदेश के अनुपालन में आवास एवं विकास परिषद की ओर से यह कार्रवाई की गई। सुबह से ही इलाके में भारी फोर्स तैनात कर बुलडोजर लगाए गए। इसके बाद सील भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हुई।

व्यापारियों ने किया विरोध, अधिकारियों से हुई वार्ता

कार्रवाई के दौरान मेरठ बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष और जगदंबा अस्पताल के मालिक रविंद्र गुर्जर, भारतीय किसान यूनियन धन सिंह कोतवाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितेश पंवार समेत कुछ व्यापारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने उन्हें बाजार में ही एक आवास में बैठा दिया।

एडीएम सिटी, एसपी सिटी और मजिस्ट्रेट ने उनसे वार्ता की। इसी बीच निर्माण तोड़ने के लिए बड़ी पावर क्लीन मशीन लगाई जाने लगी। मशीन को देखकर व्यापारियों में खलबली मच गई।

उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा कि कोई निर्माण नहीं तोड़ने दिया जाएगा। अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि छह निर्माण ही तोड़े जाएंगे। इसके बाद व्यापारी मान गए और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई। वहीं, मेरठ व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया।

44 संपत्तियों पर है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास एवं विकास परिषद ने आवासीय भवनों में बने व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, स्कूल, अस्पताल, मिठाई की दुकान, ज्वैलरी के शोरूम, डेयरी, सैलून आदि को सील किया था।

14 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने इन सभी 44 संपत्तियों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। इसी आदेश के तहत परिषद की ओर से इन संपत्तियों का सर्वे किया गया।

संपत्ति स्वामियों को नोटिस जारी कर 15 दिन में इनके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए गए थे। यह मियाद बहुत पहले ही पूरी हो चुकी है। अब 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई होनी है। ऐसे में आवास एवं विकास परिषद को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करना है। इसी क्रम में बुधवार को छह संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

छह संपत्तियों का नक्शा ही स्वीकृत नहीं

उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि 44 संपत्तियों में से छह ऐसी हैं, जिनका नक्शा स्वीकृत नहीं है। ये सभी आवासीय संपत्तियां हैं और इनमें नक्शा स्वीकृत कराए बिना अवैध निर्माण किए गए थे।

दशकों पुराना अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
यूपी आवास-विकास परिषद ने 1978 में शास्त्रीनगर गृहस्थानम योजना के तहत भूखंडों को आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किया था। 

अगस्त 1986 में भूखंड 661/6 आवंटित हुआ। इस पर 1990 में 22 दुकानों वाला कॉम्प्लेक्स बना। आवास विकास ने अवैध निर्माण रोकने का नोटिस दिया, पर काम जारी रहा। 
 

परिषद ने 2005 में ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किए। 17 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भूखंड 661/6 कॉम्प्लेक्स को अवैध घोषित कर ध्वस्त करने का आदेश दिया।

आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर हुई। 17 सितंबर 2025 को कोर्ट ने सभी अवैध निर्माण ध्वस्त करने का आदेश दिया।

25 अक्तूबर 2025 को 22 दुकानों वाला कॉम्प्लेक्स ढहा दिया गया। 27 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट में आवासीय प्लॉटों पर व्यावसायिक गतिविधियां ध्वस्त करने का आदेश दिया।