रायपुर , संवाददाता : छत्तीसगढ़ के दिव्यांग कल्याण घोटाले (एसआरसी-पीआरआरसी) में सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। करीब एक हजार करोड़ रुपये की संभावित गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी में है। मामले में दस्तावेज की पड़ताल, पूछताछ और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। मामले से जुड़ी याचिका में कई पूर्व और वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इसमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ और सुनील कुजूर के साथ डॉ. आलोक शुक्ला, एमके राउत और बीएल अग्रवाल जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा सतीश पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी और तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह का संदर्भ भी सामने आया है। आरोप था कि दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए संचालित संस्थाओं (एसआरसी और पीआरआरसी) में कागजों पर कर्मचारियों की नियुक्ति दिखाकर वेतन निकाला गया। कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों के नाम पर नकद भुगतान और वित्तीय गड़बड़ियों के भी आरोप लगे थे। हालांकि, सूत्रों के अनुसार सीबीआइ की अब तक की जांच में दोनों संस्थाओं का वास्तविक खर्च महज 35-40 करोड़ रुपये के आसपास पाया गया है। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। आरोपित अफसर अन्य मामलों में भी दागीजांच के दायरे में आए कई अधिकारी पहले से ही अन्य बड़े मामलों में घिरे रहे हैं। विवेक ढांढ का नाम शराब घोटाले में, डा. आलोक शुक्ल का नॉन घोटाले में और बीएल अग्रवाल का शेयर व फर्जी बैंक खाता घोटाले, आय से अधिक संपत्ति और मनी लांड्रिंग मामलों में आ चुका है। सुनील कुजूर और एमके राउत भी अन्य मामलों की जांच का सामना कर चुके हैं। Post navigation दिल्ली पुलिस की ‘किलाबंदी’ से जंतर-मंतर नहीं पहुंच सके प्रदर्शनकारी भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी पर मोहम्मद शमी का तीखा रिएक्शन