नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क; 1972 में हुए अपोलो 17 के बाद पहली बार इंसान चंद्रमा के पास पहुंचने जा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने मानवयुक्त मिशन आर्टेमिस-II के प्रक्षेपण के लिए छह मार्च का लक्ष्य तय किया है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे।
लॉन्च से पहले की महत्वपूर्ण वेट ड्रेस रिहर्सल प्रक्रिया इस सप्ताह सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई। यह एक तरह की पूरी काउंटडाउन रिहर्सल होती है, जिसमें रॉकेट में अत्यधिक ठंडा ईंधन भरा जाता है।
क्यों टालना पड़ा था प्रक्षेपण ?
पहले प्रयास के दौरान हाइड्रोजन गैस का रिसाव मिला था, जिसके कारण प्रक्षेपण टालना पड़ा और इंजीनियरों ने विस्तृत तकनीकी जांच की। अब एजेंसी ने पुष्टि की है कि रिसाव की समस्या दूर कर दी गई है और हालिया परीक्षण में कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
अंतरिक्ष यात्री जल्द ही सॉफ्ट क्वारंटीन में जाएंगे
इस मिशन के लिए अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली (एसएलएस) राकेट का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे नासा का अब तक का सबसे शक्तिशाली राकेट माना जाता है। यही राकेट अंतरिक्ष यात्रियों को ओरियन यान में लेकर चंद्रमा की दिशा में भेजेगा।
अगले सप्ताह के अंत तक उड़ान तैयारी समीक्षा किया जाएगा, जिसमें राकेट के इंजन, एवियोनिक्स, लाइफ-सपोर्ट सिस्टम और अन्य सभी तकनीकी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाएगी। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही अंतिम प्रक्षेपण की मंजूरी दी जाएगी।
सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए नासा ने यह भी कहा है कि अंतरिक्ष यात्री जल्द ही साफ्ट क्वारंटीन में जाएंगे, ताकि मिशन से पहले उनका स्वास्थ्य पूरी तरह सुरक्षित रहे।
क्यों टालना पड़ा था प्रक्षेपण ?
पहले प्रयास के दौरान हाइड्रोजन गैस का रिसाव मिला था, जिसके कारण प्रक्षेपण टालना पड़ा और इंजीनियरों ने विस्तृत तकनीकी जांच की। अब एजेंसी ने पुष्टि की है कि रिसाव की समस्या दूर कर दी गई है और हालिया परीक्षण में कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
