नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों में इस मौसम की पहली बर्फबारी और घाटी के मैदानी इलाकों में बारिश हुई। यह 40 दिनों की कड़ाके की ठंड के पहले दिन की शुरुआत है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘चिल्लई कलां’ कहा जाता है। तीन महीने के सूखे के बाद बारिश और बर्फबारी से वायु प्रदूषण घटा, सांस लेना सुरक्षित और आसान हो गया लगभग तीन महीने से चला आ रहा सूखा रविवार को खत्म हो गया, जब बारिश और बर्फबारी ने हवा से सभी सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर को धो दिया, जिससे सांस लेना सुरक्षित और आसान हो गया। लोगों ने मौसम की पहली बर्फबारी और बारिश से राहत की सांस ली। शहर और कस्बों में हवा साफ हो गई। गुलमर्ग और सोनमर्ग में पहली बर्फबारी से पर्यटन उत्साह बढ़ा है, और लोग नए साल का स्वागत भरपूर बर्फबारी के बीच करने की योजना बना रहे हैं गुलमर्ग के स्की रिजॉर्ट और सोनमर्ग हिल स्टेशन पर भी सीजन की पहली बर्फबारी हुई। बर्फ न होने की वजह से क्रिसमस और नए साल के जश्न के फीके रहने की चिंता कर रहे लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि गुलमर्ग और दूसरे हिल स्टेशनों पर भरपूर बर्फबारी के बीच नए साल का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में टूरिस्ट आएंगे। इस मौसम में पहली बार श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि गुलमर्ग और पहलगाम में क्रमशः माइनस 1.5 डिग्री और 2.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में मौजूद सभी बारहमासी पानी के जलाशय चिल्लई कलां के दौरान भारी बर्फबारी से भर जाते हैं। रात भर बादल छाए रहने की वजह से पूरी घाटी में रात का तापमान बढ़ गया। Post navigation Bareilly : एक बूथ ऐसा भी, जहां 1123 में से सिर्फ 102 मतदाता ही पात्र कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह को किया याद