China ने लगाया निर्यात प्रतिबंध तो भड़क गया Japan

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रिपब्लिक समाचार, वर्ल्ड डेस्क : Diplomatic Conflict : जापान और चीन (China Japan relations) के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक तनाव में बहुत ज्यादा गर्मागर्मी आ गई है। चीन की ओर से हाल ही में जापान की 20 रक्षा-संबंधित कंपनियों पर ‘दोहरे उपयोग’ (Dual-use) वाले सामान के निर्यात पर रोक लगाने (Rare earth export ban)के फैसले से टोक्यो नाराज हो गया है। जापान ने इस कदम का सख्त विरोध करते हुए बीजिंग से ये प्रतिबंध तुरंत वापस लेने की मांग की है।

एक वरिष्ठ जापानी अधिकारी ने क्योडो न्यूज के हवाले से पुष्टि की है कि जापान सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जापान के उप मुख्य कैबिनेट सचिव केई सातो ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन के इस फैसले को “बिल्कुल असहनीय और बहुत खेदजनक” करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि जापान इस कदम के संभावित प्रभावों का गहराई से आकलन कर रहा है और इसके जवाब में आवश्यक कदम उठाने पर विचार करेगा।

क्या हैं ये ‘दोहरे उपयोग’ वाली वस्तुएं ? (Taiwan conflict)

जापानी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने चीन में अपने दूतावास के माध्यम से इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह पूरा विवाद उन ‘दोहरे उपयोग’ वाली वस्तुओं को लेकर है, जिनका नागरिक और सैन्य, दोनों तरह के उपकरणों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें मुख्य रूप से ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ (Rare Earth Elements) शामिल हैं, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों, विमानों और आधुनिक हथियारों के निर्माण के लिए बहुत जरूरी हैं। गौरतलब है कि चीन इन दुर्लभ खनिजों का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर है। इससे पहले 6 जनवरी को भी चीन ने जापान के लिए ऐसे ही निर्यात नियम सख्त कर दिए थे।

क्यों बढ़ा दोनों देशों में तनाव ? (China Japan tention)
जानकारों का मानना है कि इन व्यापारिक प्रतिबंधों की जड़ें हालिया राजनीतिक बयानों में छिपी हैं। पिछले साल नवंबर में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एक अहम बयान में कहा था कि अगर ताइवान पर कोई हमला होता है, तो जापान के आत्मरक्षा बल जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। माना जा रहा है कि चीन का यह निर्यात प्रतिबंध जापान के उसी कड़े रुख का सीधा जवाब है।

जापानी कंपनियों में हड़कंप (Japan defense companies)
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, जिन कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड किया गया है, उनमें मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज (Mitsubishi Heavy Industries) और कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज (Kawasaki Heavy Industries) जैसी दिग्गज कंपनियों की सहायक इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा, जापान के रक्षा मंत्रालय के लिए विमान इंजन बनाने वाली IHI कॉर्पोरेशन भी इस सूची में हैं। इन कंपनियों का कहना है कि वे अभी भी स्थिति और प्रतिबंध के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जापान बिजनेस फेडरेशन ने भी इस फैसले को अनुचित बताते हुए सरकार से मामला सुलझाने की अपील की है।

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