Kashmir : चोगल गांव का पनीर घर लाना न भूलें, घाटी में है सबसे मशहूर

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कुपवाड़ा , संवाददाता :अगर आप उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में चोगल जाते हैं तो इस गांव में बना पनीर घर लाना न भूलें। यहां बनने वाला पनीर पूरे कश्मीर में मशहूर है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेचा जाता है।

कुपवाड़ा के चोगल गांव का पनीर शुद्धता और उच्च गुणवत्ता के लिए पूरे कश्मीर में मशहूर है और इसे दुबई तक भेजा जाता है। गांव के अधिकांश लोग डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं। गांव के बुज़ुर्गों का कहना है कि पिछले चार दशकों से पनीर बनाने वाले लोगों ने इस स्थानीय चीज में कभी कुछ नहीं मिलाया, जिसकी वजह से इस गांव का नाम चामन चोगल (पनीर वाला चोगल) पड़ गया है। गांव के ज्यादातर लोग पनीर बनाने के काम से जुड़े हुए हैं। कुपवाड़ा जिले में रिकॉर्ड के हिसाब से सबसे बड़े डेयरी फार्म हैं।

हर घर में एक या दो गायें हैं जो बड़ी मात्रा में दूध देती हैं। चोगल ने न सिर्फ कुपवाड़ा को दूध और दुग्ध उत्पादों के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि श्रीनगर और कश्मीर के दूसरे जिलों में भी अतिरिक्त आपूर्ति करने की क्षमता विकसित की है।

कुपवाड़ा-सोपोर रोड पर बसा चोगल गांव हंदवाड़ा शहर से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर है और इसे दूध गांव के नाम से भी जाना जाता है

कुपवाड़ा-सोपोर रोड पर बसा चोगल गांव हंदवाड़ा शहर से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर है और इसे दूध गांव के नाम से भी जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में चोगल के पनीर विक्रेताओं ने उच्च गुणवत्ता का पनीर बनाने में अपने हुनर को और निखारा है। ज्यादातर लोग अपना दूध यहीं बेचना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें इसके बेहतर दाम मिलते हैं, जिसे बाद में पनीर और दूसरे डेयरी उत्पादों में बदल दिया जाता है।

विक्रेताओं के मुताबिक इस शुद्ध पनीर ने आसपास के गांवों जैसे गुलूरा, गुंड चोगल, कुलटूरा, ताकिबल और कुलगाम के निवासियों को रोजगार के अवसर दिए हैं। लोगों का दावा है कि इस इलाके में लोग रोजाना लगभग 4 लाख रुपये का पनीर, दूध और अन्य दुग्ध पदार्थ बेचते हैं। पनीर विक्रेता रियाज अहमद ने बताया कि उनका परिवार वर्ष 1985 से इस धंधे में है। वह तब से ही पनीर बेच रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वह हर दिन 70-80 किलो पनीर बेचते हैं और साथ ही लोगों को दूध भी बेचते हैं। घाटी के बड़े नेता जैसे फारूक अब्दुल्ला और अन्य उनकी दुकान से स्वादिष्ट पनीर मंगवाते हैं और टीटवाल से बनिहाल तक के लोग इसे खरीदने आते हैं।

आस-पास के सभी गांवों से दूध इकट्ठा करते हैं, जिससे पनीर बनाया जाता है। उन्हें दुबई से भी पनीर के ऑर्डर मिलते हैं

वे आस-पास के सभी गांवों से दूध इकट्ठा करते हैं, जिससे पनीर बनाया जाता है। उन्हें दुबई से भी पनीर के ऑर्डर मिलते हैं और ऑर्डर मिलने पर वे इसे दुबई और दूसरे देशों में भेजते हैं। हाल ही में उन्होंने 70 किलो पनीर दुबई भेजा था। वे आमतौर पर ऑर्डर पर ही दुबई पनीर भेजते हैं, क्योंकि दुबई में रहने वाले या काम करने वाले कश्मीरी लोग चोगल का पनीर पसंद करते हैं।

सरकार को छोटी-छोटी यूनिट्स बनानी चाहिए
चोगल के एक निवासी आशिक अहमद ने बताया कि उनका बेटा बांग्लादेश में पढ़ रहा है। उसने हमेशा इस गांव में बने पनीर को भेजने का अनुरोध किया है। हम उसे नियमित रूप से पनीर भेजते रहते हैं और उसके साथ पढ़ने वाले दूसरे देशों के लोग हमेशा उससे घर से पनीर मंगवाने के लिए कहते हैं। गांव के लोग गांव में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी चाहते हैं ताकि वहां दूध से बने अलग-अलग उत्पाद बनाए जा सकें। उनका मानना है कि अगर सरकार इस यूनिट में दिलचस्पी रखती है तो उसे ऐसे छोटी-छोटी यूनिट्स बनाने पर ध्यान देना चाहिए। ये इलाके के अनपढ़ लोगों को रोजगार के अवसर भी देंगी।

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