CJI बीआर गवई बोले – मैं तो थर्ड आकर भी सीजेआई बना

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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी आर गवई ने शनिवार को गोवा में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। गोवा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में दिए एक भाषण में अपने कॉलेज के दिनों को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने कार्यपालिका से जुड़े तमाम विषयों पर अपनी बातों को रखा।

कार्यक्रम में अपना संबोधन देते हुए उन्होंने कहा कि कार्यपालिका में जज की भूमिका निभाने की इजाजत देना संविधान में निहित सेपरेशन ऑफ पावर के सिद्धांत को कमजोर करने का काम करता है।

बुलडोजर एक्शन पर कही ये बात

इस दौरान उन्होंने देश में बढ़ रहे बुलडोजर एक्शन पर भी अपनी बातों को रखा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हाल के दिनों में सुनाए गए फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे गर्व है कि हमने कार्यपालिका को जज बनने से रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। संविधान, न्यायपालिका और विधायिका के बीच सेपरेशन ऑफ पाव को मान्यता देता है। अगर कार्यपालिका को यह अधिकार दिया गया तो वह संवैधानिक ढांचे को गहरी चोट पहुंचाएगा।

किसी के दबाव में नहीं लिए जाते हैं फैसले
वहीं, क्रीमी लेयर और अनुसूचित जाति में उप-वर्गीकरण पर अपने विवादास्पद फैसले का भी सीजेआई ने यहां पर जिक्र किया। उन्होंने कहा इस फैसले की तो मेरी ही कम्यूनिटी के लोगों ने कड़ी आलोचना की। हालांकि, मैंने हमेशा से मानता हूं कि फैसला जनता के इच्छाओं और किसी के दबाव पर नहीं लिया जाता है। बल्कि कानून और अपनी अंतरात्मा के अनुसार होना चाहिए।

सीजेआई ने अपने कॉलेज के दिनों का भी जिक्र किया

छात्रों को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में कानून के छात्र नामांकित हैं, जिनमें से कई को बुनियादी ढांचे, संकाय की गुणवत्ता और पाठ्यक्रम डिजाइन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए हितधारकों को पूरे देश में कानूनी शिक्षा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा प्रणाली में आमूल चूल परिर्वतन देखने को मिला है। उन्होंने आगे कहा कि कोई छात्र अपने परीक्षा के रैंक पर ना ध्यान दें। ऐसा इसलिए क्योंकि परिणाम तय नहीं करते कि आप किस स्तर की सफलता प्राप्त करेंगे। आपका दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत, समर्पण और पेशे के प्रति प्रतिबद्धता ही मायने रखती है।

मैं तीसरा आया फिर भी सीजेआई बना
वहीं, सीजेआई ने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए कहा कि मैं एक मेधावी छात्र था, लेकिन अक्सर कक्षाएं छोड़ देता था। जब मैं मुंबई के गवर्नमेंट ला कालेज में पढ़ रहा था तो मैं कक्षाएं छोड़कर कालेज कंपाउंड की दीवार पर बैठा करता था। मेरे दोस्त कक्षा में मेरी उपस्थिति दर्ज कराते थे। (कानून की डिग्री के) आखिरी साल में मुझे अमरावती जाना पड़ा क्योंकि मेरे पिता (महाराष्ट्र) विधान परिषद के अध्यक्ष थे

उन्होंने कहा, “हमारे पास मुंबई में घर नहीं था। जब मैं अमरावती में था तो मैं लगभग आधा दर्जन बार ही कॉलेज गया। मेरे एक दोस्त, जो बाद में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने, मेरी उपस्थिति दर्ज कराते थे। परीक्षा परिणामों में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाला मेरा सहपाठी आगे चलकर आपराधिक मामलों का वकील बना, जबकि दूसरा स्थान प्राप्त करने वाला छात्र उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बना..और तीसरा मैं था, जो अब भारत का प्रधान न्यायाधीश हूं।”

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