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रिपब्लिक समाचार, डिजिटल डेस्क : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को ओडिशा के भुवनेश्वर में ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क के सहयोग से ओडिशा सरकार द्वारा आयोजित ब्लैक स्वान समिट, इंडिया में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने तेजी से बदलती तकनीक, उससे जुड़ी चुनौतियों और डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान युग में प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है। नए आविष्कार इतनी तेजी से सामने आ रहे हैं कि कई बार हमारी प्रणालियां, कौशल और कारोबारी मॉडल उनके साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति जहां नवाचार और विकास के नए अवसर पैदा कर रही है, वहीं साइबर सुरक्षा जोखिम, डीपफेक, भ्रामक सूचना और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

ब्लैक स्वान समिट से नवाचार को बढ़ावा

द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि ब्लैक स्वान समिट जैसे आयोजनों के माध्यम से कौशल विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे क्षमताओं को मजबूत करने, रोजगार सृजन और डिजिटल एवं वित्तीय परिवर्तन को गति देने के लिए प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग के नए रास्ते सामने आते हैं।

भारत की फिनटेक क्रांति की झलक

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की वित्तीय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिले हैं। किसानों, छोटे दुकानदारों और महिलाओं के बीच बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान अब आम हो चुके हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि इन वर्गों के लिए फिनटेक केवल एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि जीवनरेखा बन चुका है।

फिनटेक में महिलाओं की भागीदारी जरूरी

राष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि भारत की फिनटेक यात्रा को महिला-पुरुष समानता और सामाजिक न्याय की कहानी के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल अंतिम उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि पेशेवर, उद्यमी और नीति निर्धारण में सहभागी के रूप में शामिल करना आवश्यक है। हर नई नीति और प्लेटफॉर्म का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय इको-सिस्टम में कितना सशक्त बनाता है।

डिजिटल समावेशन पर विशेष जोर

द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वित्तीय प्रौद्योगिकी अपने आप में समावेशन की गारंटी नहीं देती। दूरदराज, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ऐसे नागरिक हैं जो डिजिटल उपकरणों से परिचित नहीं हैं। उन्हें आवश्यक कौशल प्रदान करना विकास यात्रा में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है। तभी फिनटेक समावेशन, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है।

ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए साक्षरता अनिवार्य

उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीक का दुरुपयोग वित्तीय धोखाधड़ी के लिए भी किया जा सकता है। ऐसी ठगी को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता और सतर्कता बेहद आवश्यक है। राष्ट्रपति ने बताया कि भारत सरकार ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र जैसे कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

भारतनेत्र पहल की सराहना

राष्ट्रपति ने कहा कि कौशल विकास, वैश्विक क्षमता केंद्रों की स्थापना और नवाचार को बढ़ावा देना मानव पूंजी में निवेश है। उन्होंने ओडिशा सरकार की भारतनेत्र पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल, वित्तीय और बीमा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और नवाचार इको-सिस्टम तैयार करने की दिशा में यह अहम कदम है।