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 रायपुर, संवाददाता :  महादेव एप घोटाले व स्काई एक्सचेंज से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने व्यवसायी विकास गर्ग और उनके परिवार की 940.77 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है।

मामले में इस कार्रवाई के साथ ईडी द्वारा जब्त, अटैच या फ्रीज की गई कुल संपत्ति का आंकड़ा अब 3,800 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

ईडी की जांच में राजफाश हुआ है कि सट्टेबाजी के अवैध कारोबार से हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हो रही थी। विकास गर्ग, जो विकास ईकोटेक और एराया लाइफस्पेसेज जैसी लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटर हैं, उन्होंने इस काली कमाई को वैध बनाने के लिए जटिल वित्तीय तंत्र का उपयोग किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध धन को पहले फर्जी एंट्री से शेल कंपनियों में घुमाया गया, फिर इसे शेयर बाजार, रियल एस्टेट और कंपनियों के अधिग्रहण में निवेश किया गया। ईडी ने विकास गर्ग के दिल्ली स्थित घर, गोवा और नैनीताल की संपत्तियों के साथ-साथ एबिक्स कंपनी में उनकी 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी को भी अस्थायी कुर्की के दायरे में लिया है।

कानूनी शिकंजा और भगोड़ों की तलाश

महादेव सट्टा एप को लेकर दुर्ग जिले में हुई पहली प्राथमिकी के बाद देश के कई राज्यों में एफआइआर हो चुकी है। ईडी के अतिरिक्त सीबीआइ की भी चल रही समानांतर जांच में अब तक कुल 66 आरोपितों को नामजद किया जा चुका है।

इस बीच मुख्य आरोपित सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार किया जा चुका है। उस पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है।

मनी लांड्रिंग पर लगातार प्रहार

महादेव सट्टा एप मामले में यह ईडी का आठवां प्रोविजनल अटैचमेंट आर्डर है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सट्टेबाजी की इस काली कमाई का उपयोग न केवल निजी विलासिता के लिए किया गया, बल्कि इसे अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में गलत तरीके से खपाने की कोशिश की गई।

विशेष पीएमएलए न्यायालय में चल रही सुनवाई के बीच, ईडी के इस नए कदम ने उन लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिन्होंने इस अवैध सिंडिकेट को फलने-फूलने में मदद की थी।