नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : FY26 : भारतीय बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर अवधि) में सालाना आधार पर बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस दौरान शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) के स्थिर रहने का अनुमान जताया गया है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, लोन ग्रोथ के बने रहने, अधिक फीस आय और कम क्रेडिट लागत के चलते बैंकों के मुनाफे में सुधार देखने को मिल सकता है। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि आने वाले समय में लोन ग्रोथ की रफ्तार मजबूत बनी रहेगी। इसके पीछे ब्याज दरों में गिरावट के साथ-साथ जीएसटी और इनकम टैक्स में संभावित कटौती से मांग में इजाफा प्रमुख वजह हो सकती है।
सालाना आधार पर 11.7% की बढ़ोतरी की गई दर्ज
रिपोर्ट में कहा गया है कि चौथी तिमाही में शुद्ध ब्याज मार्जिन में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन इसके बाद इसमें सुधार की संभावना है। मौजूदा लोन बुक में दोबारा वृद्धि, असुरक्षित लोन सेगमेंट में स्लीपेज के सामान्य होने और जमा लागत में कमी आने से क्रेडिट लागत घटने की उम्मीद जताई गई है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 12 दिसंबर 2025 तक बैंकिंग सिस्टम में एडवांस तिमाही आधार पर 4.5% और सालाना आधार पर 11.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अधिकांश बैंकों ने अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए शुरुआती चरण में ही बचत खातों और सावधि जमा दोनों पर ब्याज दरों में कटौती कर दी है। बचत खातों की ब्याज दरों में कमी का असर फंड की लागत पर तुरंत पड़ा है, जबकि सावधि जमा की मौजूदा निश्चित ब्याज दरों के विलंबित पुनर्मूल्यांकन के चलते इसके लाभ मौजूदा तिमाही से अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की उम्मीद है।
एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसमी कृषि उतार-चढ़ाव को छोड़ दें तो अधिकांश बैंकों के लिए परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर बनी रह सकती है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, तीसरी तिमाही में स्थिर सुधार के रुझान देखने को मिलेंगे, जिससे क्रेडिट लागत के प्रभाव को सीमित करने में मदद मिलेगी।
