नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : गुलाम जम्मू-कश्मीर के गिलगित बाल्टिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष तेजी से उभरता दिख रहा है। क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए पाकिस्तान सरकार द्वारा विदेशी कंपनियों के लिए दरवाजे खोलने के निर्णय ने स्थानीय आबादी में नाराजगी को जन्म दिया है।
चीन के साथ-साथ अमेरिका और मध्य एशियाई देशों की कंपनियों को भी निवेश की अनुमति दिए जाने की खबरों ने इस असंतोष को और गहरा किया है। हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार कजाखस्तान और इंडोनेशिया ने भी सोना और तांबा खनन परियोजनाओं में रुचि दिखाई है, जिससे बाहरी हस्तक्षेप की आशंकाएं बढ़ी हैं।
पाकिस्तानी फौज को खदेड़ना का आह्वान
नाराज लोगों ने पाकिस्तानी फौज को खदेड़ने का आह्वान तेज कर दिया है। अमेरिका स्थित एक विश्लेषण मंच पर प्रकाशित लेख में इंस्टीट्यूट फार गिलगित बाल्टिस्तान स्टडीज के प्रमुख सेंग सेरिंग ने क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के कई कारण गिनाए हैं।
उनके अनुसार आतंकवाद, भौगोलिक रणनीतिक स्थिति और रेयर अर्थ खनिजों की प्रचुरता इस क्षेत्र को संवेदनशील बना रही है। से¨रग का दावा है कि पाकिस्तानी सेना खनिज संपदा के दोहन में अग्रसर है, लेकिन स्थानीय लोगों को राजस्व में समुचित हिस्सा या मुआवजा नहीं दिया जा रहा।
जब नागरिक रायल्टी की मांग करते हैं तो प्रशासन इस इलाके को विवादित जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बताकर संवैधानिक और आर्थिक अधिकार सीमित कर देता है। इससे लोगों में उपेक्षा और असुरक्षा की भावना गहराने लगी है।
कौन-कौन से तत्व हैं मौजूद
रेयर अर्थ का हाटस्पाट है गिलगित बाल्टिस्तानगिलगित-बाल्टिस्तान की तंगीर और आसपास की घाटियों को वैश्विक स्तर पर खनिज संपदा के हाटस्पाट के रूप में देखा जाता है। यहां मोनाजाइट, शेवकिनाइट, लैंथेनम, समैरियम, प्रेजियोडाइमियम, नियोडाइमियम, सेरियम, टाइटेनियम और थोरियम जैसे कई रेयर अर्थ तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद बताए जाते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि एशिया, मध्य एशिया और यूरोप के चौराहे पर स्थित यह इलाका सामरिक ²ष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयासों को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्र को संभावित रेयर अर्थ हब के रूप में विकसित करने की कोशिशों की चर्चा तेज हुई है।
भारत में भविष्य सुरक्षित सेरिंग ने स्थानीय लोगों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की है। उन्होंने भविष्य को लेकर भारत से संवैधानिक जुड़ाव की वकालत भी की, जिसे पाकिस्तान सरकार के दृष्टिकोण से अलग और विवादास्पद माना जा रहा है।
अलग-अलग धड़ों के बीच वैचारिक टकराव
दूसरी ओर, क्षेत्र में सक्रिय कुछ समूहों और उनके बयानों ने सुरक्षा परिदृश्य को और जटिल बना दिया है। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि अलग-अलग धड़ों के बीच वैचारिक टकराव और सांप्रदायिक तनाव की आशंकाएं बनी हुई हैं, जिससे गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगते नजर आ रहे हैं।
