CG : हाईकोर्ट ने 165 करोड़ रुपये के घोटाले की CBI जांच का दिया आदेश

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बिलासपुर, संवाददाता : CG NEWS : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 165 करोड़ रुपये के भिलाई यस बैंक घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए यह आदेश जारी किया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए कहा कि घोटाले में तथ्यों को छुपाने और जांच के नाम पर लीपापोती की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

लिहाजा पूरे घोटाले की सीबीआई से जांच कराई जाए। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दुर्ग भिलाई एसपी को निर्देशित किया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, एफआईआर और काउंटर एफआईआर सहित पूरी जानकारी सीबीआइ को सौंप दी जाए।

कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को नई एफआईआर दर्ज करने के भी निर्देश दिए हैं। अनिमेष सिंह के द्वारा की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट और हितेश चौबे के द्वारा की गई काउंटर प्रथम सूचना रिपोर्ट की संपूर्ण जानकारी सीबीआइ को देने कहा गया है। मामले में अगली सुनवाई सात अप्रैल निर्धारित की गई है।

आदेश में याचिकाकर्ता का किया उल्लेख

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्वाभिमान पार्टी का उल्लेख किया है। याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और कार्यवाहियों का भी विस्तृत जिक्र कोर्ट ने किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बीपी सिंह ने पैरवी की और अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी पूरे मामले में सहयोगी रहे। याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्र ने बताया कि हाई कोर्ट में अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी द्वारा आपराधिक रिट याचिका दाखिल की गई थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता बादशाह प्रसाद सिंह मामले के साथ संलग्न रहे। यस बैंक सुपेला शाखा भिलाई द्वारा अनिमेष सिंह के नाम पर खोले गए खाते में प्रत्येक लेनदेन का नाम सहित संपूर्ण विवरण देने कहा गया था। किंतु यस बैंक द्वारा जानकारियां न सिर्फ छुपाई गई बल्कि मनमाने ढंग से शासन की जांच के समक्ष दी गई। सरकार की जांच भी केवल पोस्टमैन की तरह लिखा पढ़ी कर चल रही थी।। इस कारण चीफ जस्टिस ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है।

दो पक्षों ने लिखाई है एफआईआर

मामले में खुर्सीपार भिलाई नगर थाने में दो अलग अलग एफआईआर दर्ज की गई थी। पहली रिपोर्ट अनिमेष सिंह द्वारा लिखी गई थी। इसके अगले ही दिन रायपुर के बड़े सिविल ठेकेदार हितेश चौबे ने अपनी तरफ से काउंटर एफआइआर दर्ज करा दी थी। प्रथम एफआईआर के तुरंत बाद लीपापोती करते हुए अनिमेष सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट को शासन द्वारा खत्म किए जाने के लिए न्यायालय को पत्र लिखा गया। जबकि हितेश चौबे के द्वारा दर्ज कराई गई एफआइआर पर अब तक जांच चल रही है। अनिमेष सिंह के द्वारा प्रकरण में विधिवत जमानत ले लिए जाने के बावजूद डीजीपी द्वारा प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया बल्कि अनिमेष सिंह को भगोड़ा घोषित करते हुए शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है।

मामले का ऐसे हुआ राजफाश
इस प्रकरण की शुरुआत 2020 में हुई, जब अनिमेष सिंह ने खुर्सीपार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके दूसरे दिन ही सिविल ठेकेदार हितेश चौबे ने काउंटर रिपोर्ट लिखाई। इसके बाद मामले में जांच की दिशा बदल गई। अनिमेष सिंह के नाम से खोले गए खाते में कुल 457 बैंक खातों से लेनदेन की जानकारी मिली।

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