शिमला , संवाददाता : हिमाचल प्रदेश में माैसम के फिर कवरट बदलने के आसार हैं। राज्य में दो दिन बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। वहीं आज राजधानी शिमला व अन्य भागों में माैसम साफ बना हुआ है। धूप खिलने से तापमान में भी इजाफा हुआ है, इससे लोगों को ठंड से राहत मिली है। मध्य पहाड़ी भागों में अधिकतम तापमान में 2-8 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस दिन से बिगड़ेगा माैसम
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य में 5, 7 और 8 फरवरी को पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। 6 और 9 फरवरी को ऊंची चोटियों पर एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। वहीं 10 और 11 फरवरी को राज्य में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश-बर्फबारी की संभावना है। वहीं अगले 3-4 दिनों के दौरान राज्य में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2-3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की बहुत अधिक संभावना है।
मरीज बुजुर्ग को कुर्सी पर बर्फ के बीच 10 किमी तक उठाया
उधर, राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में बीते दिनों हुई बर्फबारी से अभी भी दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। चंबा, कुल्लू, किन्नाैर,मंडी, लाहाैल-स्पीति व डोडरा क्वार क्षेत्र में लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही। सराज विधानसभा क्षेत्र में स्थित घाट पंचायत के दुर्गम घाट गांव में भारी बर्फबारी के कारण सड़कें कई दिनों से बंद पड़ी हैं।
गांव के बुजुर्ग शिव लाल दो दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें कंधों पर उठाकर करीब 10 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय किया और अस्पताल पहुंचाया
गांव के बुजुर्ग शिव लाल दो दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें कंधों पर उठाकर करीब 10 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय किया और अस्पताल पहुंचाया। यह सफर बर्फ से ढके रास्तों, खड़ी चढ़ाई और ठंड में बेहद जोखिम भरा था, लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता और मानवता ने इसे संभव बनाया। पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाएं आम हैं।
बर्फबारी के दौरान सड़कें बंद होने से एंबुलेंस या वाहन नहीं पहुंच पाते। किसी गर्भवती महिला की डिलीवरी हो या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, ग्रामीणों को मरीज को कंधों या पीठ पर ढोकर घंटों पैदल चलना पड़ता है। यह जीवन की कठिनाइयों को दर्शाता है, जहां आधुनिक तकनीक और मशीनरी से सड़कें साफ करना संभव है, लेकिन यह सरकार और नेताओं की प्राथमिकता में नहीं आता।
गांव के बुजुर्ग शिव लाल दो दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें कंधों पर उठाकर करीब 10 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर तय किया और अस्पताल पहुंचाया। यह सफर बर्फ से ढके रास्तों, खड़ी चढ़ाई और ठंड में बेहद जोखिम भरा था, लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता और मानवता ने इसे संभव बनाया। पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाएं आम हैं। बर्फबारी के दौरान सड़कें बंद होने से एंबुलेंस या वाहन नहीं पहुंच पाते।
किसी गर्भवती महिला की डिलीवरी हो या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, ग्रामीणों को मरीज को कंधों या पीठ पर ढोकर घंटों पैदल चलना पड़ता है। यह जीवन की कठिनाइयों को दर्शाता है, जहां आधुनिक तकनीक और मशीनरी से सड़कें साफ करना संभव है, लेकिन यह सरकार और नेताओं की प्राथमिकता में नहीं आता।
