रिपब्लिक समाचार, न्यूज़ डेस्क : सरकार राष्ट्रीय जूट विकास कार्यक्रम (एनजेडीपी) के अंतर्गत जूट के अलग-अलग उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए बाजार विकास एवं प्रमोशन स्कीम और जूट विविधीकरण स्कीम लागू कर रही है। पिछले पांच वर्ष में, इन स्कीमों को लागू करने के लिए 124.45 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। एनजेडीपी स्कीमों के तहत, प्लांट और मशीनरी खरीदने के लिए कैपिटल सब्सिडी स्कीम, जूट संसाधन सह उत्पादन केंद्र, जूट रॉ मटेरियल बैंक और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना, सरकार जूट कारीगरों, निर्माताओं और निर्यातकों को उत्पादन और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करती है।
सरकार जूट क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए एनजेडीपी लागू कर रही है
जूट उद्योग के सामने मुख्य चुनौतियां पुरानी मशीनरी और प्रौद्योगिकी, सिंथेटिक फाइबर के साथ प्रतिस्पर्धा, औसत गुणवत्ता और कच्चे जूट की कीमत में उतार-चढ़ाव हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, सरकार जूट क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए एनजेडीपी लागू कर रही है। जूट पैकेजिंग सामग्री (पैकेजिंग वस्तुओं में अनिवार्य उपयोग) अधिनियम, 1987 के प्रावधानों के तहत, सरकार यह सुनिश्चित करती है कि अनाज और चीनी का न्यूनतम प्रतिशत जूट सामग्री में पैक किया जाए ताकि जूट उद्योग और किसानों को समर्थन मिल सके। इसके अलावा, सरकार जूट के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देकर जूट किसानों को प्रोत्साहित करती है।
जूट बायोडिग्रेडेबल और टिकाऊ उत्पाद है। सरकार मूल्यवर्धन के साथ, टेक्सटाइल और नॉन-टेक्सटाइल दोनों तरह के उपयोग में जूट की क्षमता का पता लगाने के उद्देश्य से एनजेडीपी लागू कर रही है। इसके अलावा, सरकार ने बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियानों, जूट मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी के माध्यम से विभिन्न प्रकार के जूट उत्पादों के प्रदर्शन और प्रचार, और जूट निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों/प्रदर्शनियों में भागीदारी को सुविधाजनक बनाने, और उनकी बिक्री को प्रोत्साहित करके उपभोक्ताओं के बीच जूट उत्पादों की अपील को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं।
