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झांसी , संवाददाता : विश्व खाद्य दिवस पर रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में शुक्रवार को खाद्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। यहां ज्वार के रसगुल्ले, रागी के समोसे, सामा के लड्डू और बुंदेली बड़े जैसे पारंपरिक व्यंजनों ने लोगों का ध्यान खींचा। विद्यार्थियों और कृषि वैज्ञानिकों ने विभिन्न राज्यों के पकवानों के जरिए देश की समृद्ध खाद्य विरासत से परिचित कराया। विश्व खाद्य दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की थीम ‘स्वस्थ एवं बेहतर भविष्य के लिए भारत की विविधतापूर्ण खाद्य संपदा’ रही।

मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को देवतुल्य माना गया है। उसका प्रत्येक दाना अमूल्य है। उन्होंने लोगों से जरूरत के अनुसार भोजन बनाने और थाली में उतना ही लेने की अपील की, जितना खा सकें।

प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के श्रीअन्न उत्कृष्टता केंद्र की ओर से ज्वार के रसगुल्ले, ज्वार का चूड़ा, रागी के समोसे, सामा के लड्डू, रागी के आटे की खीर, प्रीमिक्स और कुकीज प्रदर्शित किए गए। इन व्यंजनों के माध्यम से श्रीअन्न की पोषण क्षमता और खाद्य उत्पादों के रूप में उसकी उपयोगिता बताई गई।

वैज्ञानिक डॉ. अनीता पोयम, डॉ. बीजिलक्ष्मी देवी और डॉ. प्रियंका शर्मा ने मणिपुर की पारंपरिक थाली सजाई

वैज्ञानिक डॉ. अनीता पोयम, डॉ. बीजिलक्ष्मी देवी और डॉ. प्रियंका शर्मा ने मणिपुर की पारंपरिक थाली सजाई। डॉ. गरिमा गुप्ता ने चावल और रागी के आटे से फरहा तैयार किया। एमएससी पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट की छात्रा मोनिका ने ड्रैगन फ्रूट से बने खाद्य उत्पाद, टमाटर का रस, जैम और हिमाचली ठेकुआ प्रस्तुत किया। हिमाली सेन ने बुंदेली बड़ा बनाया। कृषि वानिकी संकाय की छात्राओं वैष्णवी, अंशु और मुद्रिका ने झारखंड के पारंपरिक भोजन के साथ आलू टिक्की और गुलाब जामुन सहित विभिन्न व्यंजन प्रदर्शित किए। छात्राओं ने खाद्य सुरक्षा, पोषण, अन्न संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित पोस्टर एवं रंगोली बनाकर जागरूकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम में कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. घनश्याम अबरोल, डॉ. गुंजन, डॉ. रविंद्र तिवारी, डॉ. हमीद और डॉ. गौतमी शामिल रहे।

व्यंजन प्रतियोगिता में इन्हें मिले पुरस्कार
पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता की गृहिणी श्रेणी में डॉ. सुधा वर्मा को धुस्का के लिए प्रथम और वंदना महाजन को हिमाचली व्यंजन मादरा, पतीड़ एवं भटूरा के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला। संकाय सदस्य श्रेणी में डॉ. गरिमा को श्रीअन्न से बने फरहा के लिए प्रथम पुरस्कार दिया गया। मणिपुरी पारंपरिक व्यंजनों की प्रस्तुति और डॉ. प्रियंका शर्मा को हिमाचली व्यंजन सिड्डू के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला। हिमांग्री को बुंदेली बड़ा बनाने के लिए तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

विद्यार्थी श्रेणी में वैष्णवी और उनकी टीम को झालमुड़ी तथा श्रीअन्न से बने रसगुल्ले के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्रेया और मुद्रिका को सम्मानित किया गया।