नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगने के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान भारी दबाव देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 1 प्रतिशत गिरकर कारोबार करते दिखे।
सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 943 अंक यानी 1.22 प्रतिशत टूटकर 76,384 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 280 अंक यानी 1.15 प्रतिशत गिरकर 23,897 पर आ गया।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस और केमिकल इंडेक्स में करीब 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में टाइटन कंपनी, इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीराम फाइनेंस, मारुति सुजुकी, बजाज ऑटो, भारती एयरटेल और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज शामिल रहे।
इस दौरान बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया VIX करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 10.7 पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार
बाजार पर दो बड़े दबाव बने हुए हैं। पहला, पश्चिम एशिया संकट के समाधान की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाब को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है। दूसरा, ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे भारत के चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ईंधन, सोना, रासायनिक उर्वरक और खाद्य तेल की खपत कम करने तथा गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने की अपील बढ़ते आर्थिक दबाव को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम, उर्वरक, सोना, एविएशन और होटल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों पर निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है, जबकि फार्मास्युटिकल सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 4.41 प्रतिशत बढ़कर 105.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.12 प्रतिशत उछलकर 100.31 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग करीब 0.3 प्रतिशत नीचे रहे, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 प्रतिशत से अधिक चढ़ा।
