बरेली, संवाददाता : बरेली के गांव सथरापुर में आधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट 100 टन क्षमता का कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट बनेगा। इसमें कचरे से बायोगैस बनाई जाएगी। बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड की बोर्ड बैठक में प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है।
बरेली शहर को स्वच्छ और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोमवार को कमिश्नर भूपेंद्र एस चौधरी की अध्यक्षता में हुई बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड की बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। शहर से रोजाना निकलने वाले 450 मीट्रिक टन दैनिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया गया। पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच एलपीजी आपूर्ति की अनिश्चितता को देखते हुए गांव सथरापुर में एक आधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट 100 टन क्षमता का कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया।
सीबीजी प्लांट में गीले कचरे, गोबर और स्लज की मदद से बायोगैस तैयार की जाएगी। कूड़ा उठान के लिए क्लोज्ड कंटेनर सिस्टम सहित अन्य नए वाहनों की खरीद की जाएगी, ताकि परिवहन के दौरान गंदगी न फैले। बैठक में नारियल के छिलकों और धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूलों के निस्तारण के लिए भी अलग प्लांट लगाने की रणनीति तैयार की गई है।
सिटीज 2.0 का दिया गया प्रस्तुतीकरण
कमिश्नर सभागार में आयोजित इस बैठक के दौरान सिटीज 2.0 परियोजना का प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में स्थानीय संसाधनों से ऊर्जा बनाना न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी सुरक्षित कदम है। बैठक में बरेली स्मार्ट सिटी के सीईओ संजीव कुमार मौर्य, बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए और अपर नगर आयुक्त शशिभूषण राय मौजूद रहे।
पाइपों से स्टेशन तक पहुंचेगी गैस
प्लांट में बनने वाली गैस पाइपों के जरिए स्टेशन तक पहुंचेगी। बताया जा रहा है कि प्लांट का संचालन शुरू होने के बाद गैस की सप्लाई की जिम्मेदारी किसी एजेंसी को दी जा सकती है, ताकि वह आसानी से संबंधित स्टेशन तक पहुंच सके।
बरेली स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि स्मार्ट सिटी की बैठक के दौरान कई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। सिटीज 2.0 पर फोकस रहा। कूड़ा निस्तारण से जुड़े बिंदुओं पर दिशा-निर्देश मिले हैं।
