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नई दिल्ली ,डिजिटल डेस्क : देश के तीन सबसे बड़े धर्मस्थल विवादों बनारस ज्ञानवापी, मथुरा कृष्ण जन्मस्थान-शाही मस्जिद ईदगाह और संभल जामा मस्जिद विवाद को आपसी सुलह समझौते के जरिए निपटाने की जगी उम्मीद शुरू में ही समाप्त होती दिख रही है।

मंदिर-मस्जिद दोनों पक्षों ने आपसी सुलह समझौते से मध्यस्थता के जरिए विशेष लोक अदालत में इन विवादों को निपटाने की सुप्रीम कोर्ट की पहल अस्वीकार कर दी है। दोनों पक्षों का कहना है कि उनके विवाद विधिवत सुनवाई से अदालत के जरिये निपटाए जाने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट कर रहा आयोजन

सुप्रीम कोर्ट मेगा लोक अदालत समाधान समारोह 2026 आयोजित कर रहा है। इसके तहत 21, 22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में विशेष लोक अदालत आयोजित होगी, जिसमें पक्षों द्वारा आपसी सुलह समझौते से केस निपटाए जाएंगे। इन विशेष लोक अदालतों में सुलह समझौते से निपटाए जा सकने वाले मुकदमों की सुप्रीम कोर्ट पहचान करता है और फिर उन्हें विशेष अदालत में निपटाने के लिए पक्षकारों को प्रस्ताव भेजा जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी क्रम में बनारस के ज्ञानवापी, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही मस्जिद ईदगाह और संभल की जामा मस्जिद विवाद को भी समाधान समारोह के तहत लगने वाली विशेष लोक अदालत में सुलह समझौते से सुलझाने के लिए चिह्नित किया था।

सर्वोच्च अदालच ने भेजा था नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में पक्षकारों को नोटिस भेजकर सूचित किया था कि उनके मामलों को भी 21 ,22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत में निपटाने के लिए उचित पाया गया है और चिह्नित किया गया है।

इसके साथ ही पक्षकारों को एक तय तारीख देकर कहा गया था कि उक्त तारीख पर वे प्रि कंसिलियेशन यानी विशेष लोक अदालत में विवाद निपटाने से पहले आपसी मध्यस्थता और सुलह समझौते से विवाद निपटाने पर बातचीत और सहमति के लिए पेश हों।

जब मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट की इस पहल और प्रस्ताव पर तीनों ही मामलों में मंदिर पक्ष के पक्षकार और वकील हरिशंकर जैन से संपर्क किया और पूछा कि क्या वे विशेष लोक अदालत में विवाद के निपटारे के प्रस्ताव पर सहमत हैं और उसमें हिस्सा लेंगे तो हरिशंकर जैन ने कहा कि उन्हें ये प्रस्ताव अस्वीकार्य हैं और वे लोकअदालत में विवाद निपटारे के लिए भाग लेने नहीं जाएंगे।

मीडिया ने ज्ञानवापी की अंजुमन इंतजामियां मसाजिद के संयुक्त सचिव एस. एम. यासीन से बात की

इसके बाद मीडिया ने ज्ञानवापी की अंजुमन इंतजामियां मसाजिद के संयुक्त सचिव एस. एम. यासीन से बात की जिसमें यासीन ने बताया कि उन्हें सूचना मिली है लेकिन मस्जिद पक्ष को यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं है। मस्जिद पक्ष कोर्ट की सुनवाई से हल चाहता है। उनका कहना है कि दो दर्जन से ज्यादा केस वाराणसी जिला अदालत में इससे संबंधित लंबित हैं।

यासीन कहते हैं कि अगर इतनी समझदारी होती तो ये केस ही नहीं होते। ये समझौते से नहीं होगा। मीडिया ने मथुरा की शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद से जब पूछा तो उन्होंने कहा कि समझौते का कोई मतलब नहीं है। 18 मुकदमे लंबित हैं। ज्यादातर पक्षकार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष सुलह समझौते के लिए नहीं आए।

तनवीर ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार और विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजा है जिसमें कहा है कि मेरा केस समाधान समारोह के तहत आयोजित विशेष लोक अदालत में न लगाया जाए। उन्होंने कहा कि 1968 में जो समझौता हो गया था, उसकी डिक्री है। तो अब समाधान की क्या जरूरत है। मीडिया ने संभल की शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली से बात की तो उन्होंने कहा कि वैसे तो उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है।