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दंतेवाड़ा, संवाददाता : जंगल की घनी झाड़ियों में छिपकर रहने वाला नन्हा माउस डियर बुधवार को जान बचाने के लिए भागते-भागते दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंच गया। उसके पीछे कुत्ते पड़े थे। घबराया हुआ माउस डियर कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचा तो लोगों की नजर उस पर पड़ी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

वनकर्मियों ने सावधानीपूर्वक माउस डियर को कब्जे में लिया। इसके बाद पशु चिकित्सा अधिकारी ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया और आवश्यक उपचार किया। कुछ समय निगरानी में रखने के बाद जब वह पूरी तरह स्वस्थ मिला तो वन विभाग की टीम उसे बचेली वन क्षेत्र में ले गई। यहां उसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास में उसे सुरक्षित छोड़ दिया गया।

आबादी में पहुंचना असामान्य

माउस डियर आमतौर पर घने जंगलों और झाड़ियों के बीच रहना पसंद करता है। यह बेहद शर्मीला वन्यजीव है और खतरा महसूस होने पर तेजी से झाड़ियों में छिप जाता है। कुत्तों के पीछा करने के कारण वह अपने प्राकृतिक आवास से काफी दूर निकल आया और कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच गया। रेस्क्यू के बाद वन अमले ने उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी रखी।

हिरन जैसा, लेकिन हिरन नहीं

माउस डियर को भारतीय चीतल शेवरोटेन भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम मासकिओला इंडिका है। यह देखने में छोटे हिरन जैसा लगता है, लेकिन हिरन परिवार का सदस्य नहीं है। इसका शरीर करीब 50 से 60 सेंटीमीटर लंबा और वजन लगभग तीन किलोग्राम तक होता है।

नर-मादा दोनों के सींग नहीं होते

शरीर पर सफेद धब्बे और धारियां इसकी खास पहचान हैं। नर और मादा दोनों के सींग नहीं होते। यह मुख्यतः रात और सुबह-शाम सक्रिय रहता है। इसके छिपकर रहने और कम दिखाई देने वाले स्वभाव के कारण इसकी आबादी का आकलन चुनौतीपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में इसे कम चिंताजनक श्रेणी में रखा गया है। भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-एक में शामिल कर विशेष संरक्षण दिया गया है।